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Durg : धान की फसल पर ‘‘राइस पैनिकल माइटश् का खतरा’’ कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी, सतर्क रहकर नियंत्रण उपाय अपनाने की अपील …

CG: Another murder incident in Mandir

दुर्ग, ( मनीष त्रिपाठी पत्रकार ) वर्तमान में धान की फसल गभोट (बालियां निकलने की शुरुआती अवस्था) से लेकर दूध भरने की संवेदनशील अवस्था में है। मौसम में आ रहे बदलाव को देखते हुए कृषि विभाग जिला दुर्ग द्वारा किसानों के लिए विशेष अलर्ट और तकनीकी एडवाइजरी जारी की गई है। इस समय धान की फसल पर राइस पैनिकल माइट (धान की मकड़ी) के आक्रमण की संभावना बढ़ गई है। यदि समय पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इससे धान की पैदावार में 5 से 25 प्रतिशत तक की भारी कमी आ सकती है।
कृषि विज्ञान केंद्र पाहंदा (अ) के वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस सूक्ष्म कीट का वैज्ञानिक नाम स्टेनेओटार्सोनेमस स्पिन्की है। यह कीट मुख्य रूप से धान के गभोट और बालियों के दानों में रस चूसकर नुकसान पहुंचाता है।

प्रमुख लक्षण और फैलाव के कारण

लक्षण:- इस कीट के प्रकोप से पौधों की पत्तियों पर सफेद और भूरी धारियां या दंश के निशान बनने लगते हैं। बालियों पर फफूंद और जीवाणु संक्रमण के कारण काले व कत्थई धब्बे दिखाई देते हैं। संक्रमित दाने बदरंग (कत्थई, लाल या काले) हो जाते हैं, जिससे चावल का विकास रुक जाता है और बालियां खाली (बदरा) रह जाती हैं।
फैलाव के कारण:- खेतों में नाइट्रोजन (यूरिया) का असंतुलित और अत्यधिक उपयोग इस कीट के पनपने का मुख्य कारण है। इसके अलावा मेड़ों पर खरपतवार, जंगली धान, संक्रमित बीज, सिंचाई का पानी और संक्रमित खेतों में इस्तेमाल किए गए कृषि यंत्रों व मजदूरों के कपड़ों के माध्यम से भी यह तेजी से फैलता है।
कीट का जीवन चक्र:- यह कीट बेहद कम समय में तेजी से वंश वृद्धि करता है। इसकी मादा एक बार में 50 से 80 अंडे देती है। अनुकूल परिस्थितियों (25 से 35 डिग्री तापमान, 80 से 90ः नमी और उमस वाला मौसम) में महज 10 से 12 दिन के भीतर इसकी नई पीढ़ी तैयार हो जाती है।

कृषि विभाग द्वारा सुझाए गए नियंत्रण व बचाव के उपाय

किसान भाइयों को खेतों में यूरिया का अनुशंसित मात्रा से अधिक प्रयोग नहीं करने की सुझाव दी जाती है। इसके स्थान पर धान की गभोट एवं फूल आने की अवस्था में पोटाश और सल्फर का अनुशंसित व संतुलित मात्रा का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। खेतों और मेड़ों को पूरी तरह खरपतवार से मुक्त करने की सलाह दी जाती है। संक्रमित खेतों से कृषि यंत्रों को दूसरे खेत में ले जाने से पहले अच्छी तरह साफ किया जाना चाहिए। धान फसल में उक्त कीट का लक्षण दिखने पर स्पायरोमेसिफेन 22.9 प्रतिशत एससी की 150 मिलीलीटर एवं प्रोपीकोनाजोल 25 प्रतिशत ईसी की 150 मिलीलीटर मात्रा/एकड़ की दर से पानी में मिलाकर छिड़काव हेतु सुझाव दिया जाता है।
जिले के सभी किसान भाइयों से अपील की जाती है कि वे अपने खेतों की नियमित निगरानी करें। फसल में किसी भी प्रकार के कीट व्याधी के लक्षण दिखने पर तुरंत अपने क्षेत्र के विभागीय मैदानी अमलों या कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों से संपर्क कर मार्गदर्शन प्राप्त करें।

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