- स्टार्टअप, सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यम एवं कंपनियाँ भी कर सकती हैं आवेदन; डीपीआईआईटी मान्यता अनिवार्य नहीं; अंतिम तिथि 17 अक्टूबर 2026
दुर्ग, ( मनीष त्रिपाठी पत्रकार ) प्रदेश के अनेक स्टार्टअप और उद्यम खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और परिवहन जैसे क्षेत्रों में नई तकनीक, नए उत्पाद और नए सेवा मॉडल विकसित कर रहे हैं। सेंसर आधारित कृषि उपकरण, कृषि अवशेष से बने उपयोगी उत्पाद या सेवाओं को और सुलभ बनाने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म इसके उदाहरण हो सकते हैं। सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026 ऐसे नवाचारों को पहचान देने और उन्हें व्यापक उपयोग की ओर ले जाने का मंच है।
चैलेंज का उद्देश्य ऐसे नवाचारी समाधान सामने लाना है जो पहले से उपलब्ध तरीकों से नए और अलग हों तथा ज़मीन पर लागू किए जा सकें। इसलिए कार्यरत प्रोटोटाइप, फील्ड पायलट, उपयोगकर्ताओं की संख्या या अन्य प्रमाण रखने वाले उद्यमों के लिए यह एक उपयुक्त अवसर है। साथ ही, विचार या प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट स्तर के नवाचार भी भेजे जा सकते हैं।
स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा कंपनियाँ संस्था के रूप में आवेदन कर सकती हैं। आवेदक अथवा किसी एक संस्थापक के पास छत्तीसगढ़ का मूल निवास प्रमाण-पत्र होना अनिवार्य है। कंपनी पंजीयन अथवा डीपीआईआईटी मान्यता अनिवार्य नहीं है।
प्रत्येक विजेता को ₹10 लाख की राशि दी जाएगी। प्रत्येक क्षेत्र (सेक्टर) में पाँच विजेता होंगे – तीन सामान्य, एक महिला तथा एक 21 वर्ष से कम आयु श्रेणी से। कुल पुरस्कार राशि ₹5 करोड़ है। एक आवेदन पर एक ही पुरस्कार दिया जाएगा।
आवेदन पोर्टल sevainnovationchallenge.in पर मोबाइल ओटीपी से पंजीयन कर किया जा सकता है। एक नवाचार केवल एक बार, एक ही क्षेत्र और उप-विषय में भेजा जा सकेगा; दोहरे आवेदन निरस्त किए जाएँगे। छह स्लाइड की पीडीएफ प्रस्तुति (शीर्षक, समस्या, समाधान, व्यवहार्यता, प्रभाव, टीम; अधिकतम 10 एमबी) तथा प्रोटोटाइप या पायलट के फ़ोटो अथवा वीडियो लिंक भी अपलोड किए जा सकते हैं।
आवेदन 23 सितंबर 2026 से प्रारंभ हैं। अंतिम तिथि 17 अक्टूबर 2026, रात्रि 11:59 बजे है।

