मनीष त्रिपाठी पत्रकार
– सेवा, संवेदना और सामाजिक परिवर्तन की कहानियों के माध्यम से दिया राष्ट्रनिर्माण का संदेश
दुर्ग, / शासकीय नवीन महाविद्यालय बोरी में ‘नमो सेवा-अनकही कहानियाँ’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने समाज के सामान्य नागरिकों के जीवन-संघर्ष, सेवा, समर्पण, आत्मनिर्भरता और सामाजिक परिवर्तन से जुड़ी प्रेरक कहानियों पर आधारित केस स्टडी प्रस्तुत कीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने सेवा-भावना, मानवीय संवेदना और राष्ट्रनिर्माण में नागरिकों की भूमिका को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले ऐसे व्यक्तियों के योगदान को सामने लाना था, जिनकी उपलब्धियां और सेवा कार्य अक्सर सार्वजनिक चर्चा में नहीं आ पाते। प्रतिभागियों ने आर्थिक कठिनाइयों के बीच सफलता हासिल करने, शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन लाने, महिला सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता तथा विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष कर उपलब्धियां प्राप्त करने जैसे विषयों पर अपनी केस स्टडी प्रस्तुत कीं। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. कमर तलत ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ समाज की वास्तविक परिस्थितियों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। समाज में अनेक ऐसे सामान्य नागरिक हैं, जिनका संघर्ष, समर्पण और सेवाभाव दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है।
कार्यक्रम संयोजक प्रो. डॉ. अमरनाथ शर्मा ने कहा कि ‘नमो सेवा-अनकही कहानियाँ’ समाज के उन व्यक्तियों के योगदान को पहचान दिलाने की पहल है, जो अपने कार्यों से सकारात्मक परिवर्तन ला रहे हैं। उन्होंने बताया कि केस स्टडी सामाजिक अनुसंधान की एक महत्वपूर्ण पद्धति है। इसके माध्यम से विद्यार्थी किसी व्यक्ति के जीवन, पारिवारिक परिस्थितियों, सामाजिक परिवेश, चुनौतियों और उपलब्धियों का व्यवस्थित अध्ययन कर सकते हैं। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की अनुभवात्मक एवं शोधपरक शिक्षा की भावना के अनुरूप है।
कार्यक्रम में तथ्यों के संकलन, अध्ययन, प्रस्तुतीकरण और सामाजिक विश्लेषण की सराहना करते हुए विद्यार्थियों को वैज्ञानिक एवं विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में प्रस्तुत जीवन-कथाओं के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बड़े पद या विशेष संसाधनों का होना आवश्यक नहीं है। सेवा-भावना, परिश्रम, संकल्प और सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से सामान्य व्यक्ति भी समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। इस अवसर पर प्राचार्य, कार्यक्रम संयोजक, सहसंयोजक, विभिन्न विभागों के प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

