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Durg : बैटरी चालित ट्राईसायकल बनी देवेंद्र के जीवन का सहारा – -शासन की ‘सेवा ही संकल्प’ पहल के तहत दिव्यांगजनों के जीवन में आ रही सुगमता

Durg : बैटरी चालित ट्राईसायकल बनी देवेंद्र के जीवन का सहारा - -शासन की 'सेवा ही संकल्प' पहल के तहत दिव्यांगजनों के जीवन में आ रही सुगमता

Durg : बैटरी चालित ट्राईसायकल बनी देवेंद्र के जीवन का सहारा - -शासन की 'सेवा ही संकल्प' पहल के तहत दिव्यांगजनों के जीवन में आ रही सुगमता

मनीष त्रिपाठी पत्रकार

दुर्ग, / सरकार का मुख्य ध्येय समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना और जरूरतमंदों के जीवन को सुगम बनाना है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुसार जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाएं दिव्यांगजनों के लिए नई उम्मीद और स्वावलंबन का आधार बन रही हैं। ‘सेवा और सुशासन’ की इसी भावना का एक संवेदनशील उदाहरण जिले के नेहरू चौक, भिलाई निवासी देवेंद्र कुमार के जीवन में देखने को मिला है। नेहरू चौक भिलाई निवासी देवेंद्र कुमार 70 प्रतिशत शारीरिक दिव्यांगता के कारण अपनी दैनिक दिनचर्या और आवागमन के लिए काफी कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। एक स्थान से दूसरे स्थान जाने के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे उनका समय और ऊर्जा दोनों प्रभावित होते थे। देवेंद्र को एक ऐसे सहारे की जरूरत थी जो उन्हें गति देने के साथ आत्मनिर्भर बना सके।


देवेंद्र कुमार को जब आयोजित सेवा सेतु शिविर की जानकारी मिली, तो वे अपनी समस्या लेकर शिविर पहुंचे। उन्होंने समाज कल्याण विभाग के स्टॉल पर जाकर ‘बैटरी चालित ट्राईसायकल’ हेतु अपना आवेदन प्रस्तुत किया। शिविर में मौजूद अधिकारियों ने अत्यंत संवेदनशीलता और तत्परता दिखाते हुए उनके आवेदन की जांच की और पात्रता पाए जाने पर त्वरित स्वीकृति प्रदान की। देवेंद्र कुमार को शिविर स्थल पर ही तत्काल समाज कल्याण विभाग द्वारा ‘बैटरी चालित ट्राईसायकल’ ससम्मान प्रदान की गई। अपनी नई ट्राईसायकल पाकर देवेंद्र के चेहरे पर खुशी और संतोष झलक उठा। बैटरी चालित ट्राईसायकल मिलने पर देवेंद्र कुमार ने भावुक होकर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं जिला प्रशासन का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अब छोटी-छोटी जरूरतों और आवागमन के लिए यह ट्राईसायकल उनके जीवन का मजबूत सहारा बन गई है। बैटरी चालित ट्राईसायकल मिलने से देवेंद्र कुमार जैसे दिव्यांगजन भाई-बहन अब सम्मानपूर्वक और आत्मनिर्भर होकर अपनी जिंदगी की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

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