अंबिकापुर: सरगुजा के वन्यजीव रेस्क्यूकर्ता सत्यम द्विवेदी की पहल पर मुंह में असामान्य गांठ से जूझ रहे इंडियन रॉक पाइथन (अजगर) का बिलासपुर में सर्जिकल उपचार किया गया। पेट मेडिक्स के संचालक एवं वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. पियूष दुबे ने लगभग साढ़े तीन घंटे तक ऑपरेशन कर अजगर के मुंह के अंदर बनी गांठ को निकाला। सर्जरी के बाद अजगर को ड्रिप और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता दी गई। उसकी बेहतर रिकवरी के लिए निरंतर निगरानी की जरूरत है।
जानकारी के अनुसार, सरगुजा में रेस्क्यू के दौरान सत्यम द्विवेदी ने अजगर के मुंह में असामान्य सूजन देखी। शुरुआत में उन्हें शिकार निगलने के कारण सूजन होने की आशंका हुई, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं लगने पर उन्होंने ट्यूमर की संभावना जताई। इसके बाद वन विभाग, सरगुजा से आवश्यक अनुमति लेकर अजगर को बेहतर उपचार के लिए बिलासपुर ले जाया गया। बिलासपुर स्थित कानन पेंडारी में वन्यजीव विशेषज्ञ एवं उप संचालक डॉ. चंदन ने अजगर की स्थिति का आकलन किया। इसके बाद बेहतर उपचार के लिए उसे डॉ. पियूष दुबे के पास भेजा गया। आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और विशेषज्ञता की मदद से की गई सर्जरी में अजगर के मुंह के भीतर बनी गांठ को निकाला गया। ऑपरेशन के दौरान उसकी स्थिति गंभीर बताई गई। सर्जरी के बाद चिकित्सकीय सहायता देकर उसकी देखभाल की जा रही है।
‘स्नेक मैन ऑफ सरगुजा’ के नाम से पहचाने जाने वाले सत्यम द्विवेदी लंबे समय से क्षेत्र में सांपों और अन्य वन्यजीवों के रेस्क्यू एवं संरक्षण के कार्य में सक्रिय हैं। इस मामले में उन्होंने समय रहते असामान्य सूजन की पहचान की और वन विभाग की अनुमति लेकर अजगर को विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराने की पहल की। वहीं, डॉ. पियूष दुबे की सर्जिकल विशेषज्ञता से अजगर के उपचार में महत्वपूर्ण मदद मिली। सरीसृपों में गांठ या ट्यूमर का सर्जिकल उपचार वन्यजीव चिकित्सा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस मामले को देश में अपनी तरह का पहला उपचार बताए जाने के दावे की स्वतंत्र वैज्ञानिक अभिलेखों से पुष्टि होना बाकी है। पुष्टि होने पर यह सरीसृप चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि साबित हो सकता है।

