वसूली और नोटिस पर रोक
भिलाई/बिलासपुर । नगर निगम भिलाई के पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं के मामले में हाईकोर्ट ने सात अभियंताओं को अंतरिम राहत दी है। न्यायालय ने कलेक्टर दुर्ग के अधिक राशि की वसूली और कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई संबंधी निर्देशों तथा निगम के मुख्य अभियंता द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस पर रोक लगा दी है। साथ ही, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव सहित संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
29 अनुबंधों की जांच में 16.85 लाख रुपये के अधिक भुगतान का दावा
मामला नगर निगम भिलाई की परियोजना शाखा के तहत कराए गए पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों से जुड़ा है। शिकायत के बाद लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, दुर्ग के कार्यपालन अभियंताओं ने संयुक्त जांच की। जांच प्रतिवेदन के अनुसार, 29 अनुबंधों में से 21 में माप पुस्तिका में दर्ज मात्रा और मौके पर मिली मात्रा के बीच अंतर पाया गया। रिपोर्ट में 16,85,457 रुपये के अधिक भुगतान का उल्लेख किया गया।
इसके बाद कलेक्टर दुर्ग ने 3 सितंबर 2026 को निगम आयुक्त को पत्र लिखकर संबंधित अभियंताओं और कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा अधिक राशि की वसूली के निर्देश दिए। इसके परिपालन में निगम के मुख्य अभियंता ने उप अभियंताओं अर्पित बंजारे, चंदन निर्मल, श्वेता महेश्वर, पुरुषोत्तम सिन्हा, रीमा हुमने, कृष्ण कुमार जंघेल और सहायक अभियंता श्वेता वर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किए।
निर्माण कार्यों के भुगतान पर भी उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, वर्ष 2023 और 2024 में आवश्यक टेंडर प्रक्रिया तथा प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति के बाद विभिन्न सड़कों, फुटपाथों और चौक-चौराहों पर पेवर ब्लॉक लगाने के कार्यादेश जारी किए गए थे। इन कार्यों के लिए निगम निधि के साथ 15वें वित्त आयोग के अनुदान का भी उपयोग किया गया।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि निर्माण कार्य पूरे होने के बाद सक्षम अधिकारियों ने निरीक्षण और सत्यापन किया था, जिसके आधार पर ठेकेदारों को भुगतान किया गया। बाद में मिली शिकायत पर हुई जांच के आधार पर उनके विरुद्ध कार्रवाई शुरू की गई।
याचिकाकर्ताओं ने प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन का उठाया मुद्दा
कारण बताओ नोटिस और वसूली संबंधी निर्देशों को चुनौती देते हुए अर्पित बंजारे और अन्य अभियंताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनकी ओर से अधिवक्ता सिबाशीष मिश्रा के माध्यम से मामला प्रस्तुत किया गया। सुनवाई न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु के समक्ष हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक ने पक्ष रखा।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि जांच के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि वसूली और अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश पहले ही जारी कर दिए गए थे, जिससे निष्पक्ष सुनवाई और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर सवाल उठते हैं। उनका कहना था कि अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना कार्रवाई शुरू करना उचित नहीं है।
संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब
याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कलेक्टर दुर्ग के पत्र में दिए गए अनुशासनात्मक कार्रवाई और वसूली संबंधी निर्देशों तथा मुख्य अभियंता के कारण बताओ नोटिस पर रोक लगा दी। न्यायालय ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव, कलेक्टर दुर्ग, नगर निगम भिलाई के आयुक्त, मुख्य अभियंता और संबंधित कार्यपालन अभियंता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
यह रोक अंतरिम राहत है। मामले में अंतिम निर्णय और कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय होना अभी बाकी है।

