महासमुंद : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में दीपावली पर्व को देखते हुए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने जांच अभियान तेज कर दिया है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देश पर जिले में मिठाइयों, पनीर, दही, दुग्ध उत्पादों, खाद्य तेल और अन्य खाद्य सामग्री के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच की जा रही है। जनवरी से सितंबर 2026 के बीच विभाग द्वारा कुल 216 खाद्य नमूने संकलित किए गए। प्राप्त जांच रिपोर्टों में 5 नमूने मिथ्याछाप, 2 अवमानक और 4 नमूने असुरक्षित पाए गए हैं। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से जुड़े मामलों में अब तक कुल 11 प्रकरण दायर किए गए हैं। वहीं, सक्षम प्राधिकारी द्वारा 16 लाख 90 हजार 100 रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया गया है। दीपावली के मद्देनजर अक्टूबर महीने में भी नमूना संकलन और निरीक्षण की कार्रवाई जारी है।
जनवरी से सितंबर तक 216 खाद्य नमूने लिए गए खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अभिहित अधिकारी उमेश कुमार के मार्गदर्शन में जिलेभर में खाद्य सुरक्षा से संबंधित जांच अभियान संचालित किया गया। जनवरी से सितंबर 2026 के बीच अलग-अलग प्रतिष्ठानों और खाद्य कारोबार से जुड़े स्थानों से कुल 216 खाद्य नमूने एकत्र किए गए। इनमें 78 विधिक नमूने और 138 सर्विलेंस नमूने शामिल हैं। इन नमूनों को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के परीक्षण के लिए संकलित किया गया था। प्राप्त प्रयोगशाला जांच रिपोर्टों के आधार पर नियमों का उल्लंघन पाए जाने वाले मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
जांच में 4 नमूने असुरक्षित, 5 मिथ्याछाप और 2 अवमानक जनवरी से सितंबर 2026 तक खाद्य नमूना परीक्षण: कुल 216 नमूनों में से 11 मानक के अनुरूप नहीं पाए गए, 5 गलत लेबल वाले (मिसब्रांडेड) थे, 2 घटिया गुणवत्ता (सबस्टैंडर्ड) के थे, और 4 असुरक्षित थे। विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 13 नमूनों की परीक्षण रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 13 नमूनों की जांच रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है।
खाद्य सुरक्षा के संदर्भ में मिथ्याछाप नमूनों का संबंध भ्रामक या निर्धारित मानकों के विपरीत लेबलिंग से हो सकता है, जबकि अवमानक का अर्थ गुणवत्ता संबंधी निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरना है। असुरक्षित श्रेणी खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से अधिक गंभीर मानी जाती है। हालांकि विभागीय विवरण में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कौन-से विशिष्ट खाद्य पदार्थ इन श्रेणियों में पाए गए हैं। इसलिए किसी विशेष मिठाई, पनीर या दुकान को जांच रिपोर्ट के बिना दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
11 प्रकरण दायर, 16.90 लाख रुपये का जुर्माना खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से संबंधित मामलों में विभाग द्वारा कुल 11 प्रकरण दायर किए गए हैं। सक्षम प्राधिकारी ने संबंधित मामलों में 16 लाख 90 हजार 100 रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया है। खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा प्रयोगशाला रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। विभागीय कार्रवाई का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना तथा खाद्य कारोबारियों को निर्धारित नियमों का पालन करने के लिए जवाबदेह बनाना है। अक्टूबर में पनीर, दही और मिठाइयों के 26 नमूने संकलित दीपावली के अवसर पर मिठाइयों और दुग्ध उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा अक्टूबर में भी निगरानी जारी रखी गई है। अक्टूबर 2026 में 23 तारीख तक विभाग ने कुल 26 खाद्य नमूने संकलित किए हैं। इनमें 13 विधिक और 13 सर्विलेंस नमूने शामिल हैं। इन नमूनों में पनीर, दही, मिठाइयां, अन्य दुग्ध उत्पाद, खाद्य तेल और विभिन्न खाद्य सामग्री शामिल हैं। नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित खाद्य पदार्थ निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के अनुरूप हैं या नहीं। जांच रिपोर्ट आने के बाद होगी नियमानुसार कार्रवाई खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अक्टूबर में संकलित नमूनों की जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 तथा उसके अंतर्गत लागू नियमों एवं विनियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी नमूने में मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर उचित कदम उठाए जाएंगे। जिले के खाद्य कारोबारियों को खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग ने कारोबारियों से प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई रखने, खाद्य पदार्थों का उचित तापमान और परिस्थितियों में भंडारण करने तथा गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल का उपयोग करने के लिए कहा है। इसके अतिरिक्त निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने से निर्माण, भंडारण और परिवहन के प्रत्येक चरण में स्वच्छता का ध्यान रखना आवश्यक है।

