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राजनांदगांव : सोमनी में फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट, खपरीकला में बनेगा वेयरहाउस…

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राजनांदगांव , जिले में किसानों की उपज को बाजार दिलाने, कृषि उत्पादों के सुरक्षित भंडारण और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में दो महत्वपूर्ण फैसले हुए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में सोमनी में करीब 400 करोड़ रुपए के निवेश से मल्टी फ्रूट प्रोसेसिंग फैसिलिटी स्थापित करने और खपरीकला में केंद्रीय भंडारण निगम को 10 एकड़ जमीन आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सोमनी में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के माध्यम से प्रस्तावित परियोजना से 1,000 से अधिक प्रत्यक्ष और 5,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है। वहीं, भंडारण सुविधा विकसित होने से किसानों की उपज को सुरक्षित रखने और कृषि कारोबार को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा कटघोरा- तखतपुर- मुंगेली – कवर्धा- खैरागढ़- डों गरगढ़ रेल परियोजना के लिए शत-प्रतिशत इक्विटी निवेश की व्यवस्था को भी मंजूरी दी गई है। इससे जिले के रेल नेटवर्क से जुड़े विस्तार को गति मिलने की उम्मीद है। इन फैसलों का असर केवल औद्योगिक निवेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसानों की उपज की खरीदी, स्थानीय रोजगार, कारोबार और आवागमन की सुविधाओं पर भी पड़ सकता है।

400 करोड़ रुपए से फल की प्रोसेसिंग प्लांट लगेगा सोमनी में मल्टी फ्रूट प्रोसेसिंग फैसिलिटी स्थापित करने के लिए राजगामी संपदा की 31.55 एकड़ जमीन कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग को आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। करीब 400 करोड़ रुपए के प्रस्तावित निवेश वाली इस परियोजना का संचालन राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के माध्यम से किया जाना है। परियोजना में किसानों से सीधे फल खरीदने की व्यवस्था विकसित करने का प्रस्ताव है। इससे फल उत्पादकों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर बाजार मिलेगा।

डोंगरगढ़ रेल परियोजना को निवेश की मिली मंजूरी कैबिनेट ने 295 किलोमीटर लंबी कटघोरा-तखतपुर-मुंगेल ी-कवर्धा-खैरागढ़-डों गरगढ़ रेल परियोजना के त्वरित क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड के माध्यम से शत-प्रतिशत इक्विटी निवेश किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 8,000 करोड़ रुपए है। इसमें लगभग 2,000 करोड़ रुपए की अंशपूंजी प्रस्तावित है, जिसमें राज्य शासन और रेल मंत्रालय करीब 1,000-1,000 करोड़ रुपए का योगदान देंगे। रेल कनेक्टिविटी का विस्तार होने से राहत​ मिलेगी।

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