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CG : दोषसिद्ध प्रधान पाठक बर्खास्त, कलेक्टर की फटकार के बाद DEO ने जारी किया आदेश…

CG : दोषसिद्ध प्रधान पाठक बर्खास्त, कलेक्टर की फटकार के बाद DEO ने जारी किया आदेश...

CG : दोषसिद्ध प्रधान पाठक बर्खास्त, कलेक्टर की फटकार के बाद DEO ने जारी किया आदेश...

अंबिकापुर । सरगुजा जिले में जानलेवा हमले के मामले में दोषसिद्ध शासकीय प्रधान पाठक विजय कुमार यादव को शिक्षा विभाग ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने 22 अक्टूबर 2026 के कार्यालयीन आदेश में शासकीय प्राथमिक शाला पेण्डरखी, विकासखंड उदयपुर में पदस्थ प्रधान पाठक को तत्काल प्रभाव से सेवा से पदच्युत करने का आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई न्यायालय से दोषसिद्धि और जेल में निरुद्ध रहने के आधार पर की गई है।

कलेक्टर से शिकायत के बाद तेज हुई कार्रवाई
मामले में सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम गांधी ने कलेक्टर अजीत वसंत से दस्तावेजों के साथ शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अदालत के फैसले की जानकारी देने में संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) ने लापरवाही बरती और फाइल दबाकर रखी।

मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को तलब कर पूछताछ की और नाराजगी जताई। इसके बाद शिक्षा विभाग ने बर्खास्तगी का आदेश जारी किया।

अदालत ने पांच साल तक की सजा सुनाई थी
DEO के आदेश के मुताबिक, विजय कुमार यादव के खिलाफ मणिपुर थाने में दर्ज अपराध के मामले में पंचम अपर सत्र न्यायाधीश, अंबिकापुर ने 3 जनवरी 2026 को फैसला सुनाया था। अदालत ने उन्हें भारतीय दंड विधान की धारा 148, 323/149 और 307/149 के तहत दोषसिद्ध ठहराते हुए अधिकतम पांच वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया था।

आदेश में उल्लेख है कि यादव 3 जनवरी से 9 अक्टूबर 2026 तक केंद्रीय जेल अंबिकापुर में निरुद्ध रहे।

हाईकोर्ट से मिली जमानत, दोषसिद्धि पर रोक नहीं
DEO के आदेश में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 8 अक्टूबर 2026 को दांडिक अपील में मूल कारावास की सजा को अपील के निराकरण तक स्थगित करते हुए जमानत का लाभ दिया था। हालांकि, आदेश के अनुसार हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई थी।

इसी कानूनी स्थिति के आधार पर विभाग ने सेवा समाप्ति का निर्णय लिया। आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया है कि केवल सजा स्थगित होने या अपील लंबित रहने से दोषसिद्धि स्वतः समाप्त नहीं होती।

शिक्षक के पद पर आचरण को बताया गंभीर
विभागीय आदेश में कहा गया है कि शिक्षक का पद विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और समाज के विश्वास से जुड़ा होता है। जानलेवा हमले और हत्या के प्रयास के मामले में दोषसिद्धि को गंभीर कदाचरण मानते हुए इसे शासकीय सेवा के अनुरूप नहीं बताया गया है।

सेवा से बर्खास्तगी के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(a) और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के संबंधित प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।

भविष्य में सरकारी नियुक्ति पर भी असर
आदेश के अनुसार, सेवा से पदच्युत किए जाने के कारण भविष्य में शासन के अधीन नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति के लिए सामान्यतः अयोग्यता लागू होगी। हालांकि, यदि भविष्य में अपीलीय न्यायालय से संबंधित कर्मचारी को पूरी तरह दोषमुक्त किया जाता है, तो वह नियमानुसार सेवा में पुनर्बहाली के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आवेदन कर सकेगा।

कई वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई सूचना
बर्खास्तगी आदेश की जानकारी स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव, लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक, सरगुजा संभाग के आयुक्त, कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग और जिला कोषालय अधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों को भेजी गई है।

शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, कार्रवाई दोषसिद्धि और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर की गई है।

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