राजनांदगांव | ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में शुक्रवार को खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर के शिष्य मुनि मौलिक प्रभ सागर ने कहा कि किसी भी कार्य की कहीं न कहीं से शुरुआत करनी ही होती है। अपने को भी जानने का प्रयास करो। पुरुषार्थ करो और सिर्फ पांच मिनट अपने आप को जानने के लिए दो। इस दुनिया में हम आए हैं तो कुछ न कुछ हमें करना ही है।
हम स्वयं को जानें कि हम इस दुनिया में क्यों आए हैं? और उसी हिसाब से कार्य करें ताकि हमारा यहां आना सफल हो सके। कहा कि हम सब कहते हैं कि यह मेरा है-यह मेरा है किंतु ऐसा कुछ भी नहीं है। इस दुनिया में मेरा कुछ भी नहीं है। मुनिश्री ने कहा कि हमारे अंदर भावनाएं भरी पड़ी है, कषाय भरे पड़े हैं। हमें अपने स्वभाव को पहचानने की जरूरत है और स्वभाव को पहचान कर कषायों को दूर करना है। केवल पांच मिनट का समय अपने लिए दो और चिंतन करो।

