राजनांदगांव , सोशल मीडिया पर किसी की फोटो से छेड़छाड़ कर उसे आपत्तिजनक रूप में प्रसारित करना भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आता है। खासकर बच्चों की तस्वीरों को एआई तकनीक से बदलकर सोशल मीडिया पर अपलोड करना गंभीर मामला है। विद्यार्थियों को ऐसे अपराधों से बचाने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए शनिवार को सुरक्षित बचपन अभियान के प्रथम चरण के समापन पर जिले के चार स्कूलों में विशेष विधिक साक्षरता शिविर लगाए गए। विद्यार्थियों को गुड टच और बैड टच के बीच अंतर समझाते हुए यह भी बताया गया कि किसी के गलत व्यवहार को पहचानना और उसके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है।
न्यायाधीशों ने विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी। शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला कन्हारपुरी, वेसलियन इंग्लिश मीडियम स्कूल, स्टेट स्कूल पूर्व माध्यमिक शाला और शासकीय हाईस्कूल सोमनी में छात्र-छात्राओं को लैंगिक अपराधों, उनके कानूनी संरक्षण और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में बताया गया।
अपराध छिपाने से बढ़ता जाता है आरोपी का हौसला न्यायाधीशों ने बताया कि किसी भी बच्चे के साथ लैंगिक उत्पीड़न या दुर्व्यवहार गंभीर अपराध है। ऐसी घटना होने पर चुप रहने के बजाय तत्काल परिवार के भरोसेमंद सदस्य, शिक्षक या किसी विश्वसनीय व्यक्ति को जानकारी देनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। अपराध को छिपाने से आरोपी का हौसला बढ़ता है और उसके दोबारा ऐसी घटना करने की आशंका रहती है।

