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‘धोखे से कराए सिग्नेचर’ के दावे पर नहीं मिले प्रमाण, सिंधिया परिवार के संपत्ति विवाद में नया मोड़

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ग्वालियर
 मध्य प्रदेश के ग्वालियर के सिंधिया राजपरिवार के संपत्ति बंटवारा मामले में आपत्ति लगाने वाली प्रतिमा देवी बुधवार की सुनवाई में शामिल नहीं हो पायी. उन्हें कोर्ट में अपनी मौसियों के खिलाफ लगाये धोखाधड़ी के आरोपों पर सबूत पेश करने थे. अब 18 नवंबर तक के लिए सुनवाई टल गई है. प्रतिमा देवी ने 30 नवंबर तक समय दिए जाने की मांग की थी। 

ग्वालियर जिला न्यायालय में चल रहे सिंधिया राज परिवार के 40 हज़ार करोड़ के सम्पति पर आपसी सहमति स्व बंटवारे के मामले में कुछ समय पहले सिंधिया राज परिवार के मुखिया ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ दिवंगत पद्माराजे राणा की बेटी प्रतिमा देवी ने आपत्ति दायर करते हुए सभी पक्षकारों के खिलाफ धोखाधड़ी से सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया था. मुख्य रूप से ये आरोप अपनी तीनों मौसियों उषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे सिंधिया के खिलाफ लगाए थे. जिस पर पिछली सुनवाई में कोर्ट ने उनकी आपत्ति पर बहस के बाद आरोप सिद्ध करने के लोये सबूत पेश करने को कहा था। 

कोर्ट से 30 नवंबर तक का मांगा समय, कोर्ट ने दो हफ़्ते दिए
कोर्ट के निर्देश के अनुसार ये साक्ष्य प्रतिमा देवी को अगली सुनवाई यानी 4 नवंबर 2026 को अदालत में रखने थे. लेकिन इस सुनवाई में प्रतिमा देवी नहीं पहुंची बल्कि उनकी और से एक आवेदन लगाकर सबूत पेश करने के लिए 30 नवंबर तक का समय मांगा गया है. इस केस में वकील ऐड प्रशांत शर्मा के मुताबिक, ''कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 18 नवंबर नियत की है। 

तीनों मौसियां खारिज कर चुकी हैं आरोप
बता दें कि, प्रतिमा देवी की और से कोर्ट में आरोप लगाए गए थे कि, उनकी तीनों मौसियों ने संपत्ति बंटवारे के समझौता सहमति पत्र पर धोखे से हस्ताक्षर लिए थे. जिसके जवाब में उषा राजे, वसुंधरा राजे सिंधिया और यशोधरा राजे सिंधिया ने कोर्ट में इसका जवाब पेश किया था और आरोपों को निराधार बताया था. तीनों याचियों के मुताबिक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर पूरी तरह सहमति से ही किए गए थे. हालांकि अब प्रतिमा देवी को अगली तारीख पर अपने आरोपों के साक्ष्य कोर्ट के सामने रखने होंगे. ऐसा करने या ना करने दोनों ही परिष्ठियाँ इस केस के आगे की दिशा तय करेगी। 

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