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राजनांदगांव : रियासत के खजाने की लूट-खसोट की जा रही है, भ्रष्‍टाचार का अड्डा बन चुका है राजगामी न्‍यास – किशुन यदु

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0 दो वर्षों के कार्यकाल में ही अध्‍यक्ष वासनिक ने न्‍यास का स्‍वरुप ही बदल डाला, संस्‍कारधानी से उसकी पहचान छिन रहे हैं

राजनांदगांव।
राजगामी संपदा न्‍यास के अध्‍यक्ष विवेक वासनिक पर मनमानी, अपनी ही संस्‍था, रिश्‍तेदारों को लाभ पहुंचाने और भ्रष्‍टाचार के आरोप लगे हैं। नेता प्रतिपक्ष किशुन यदु ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए कहा कि अक्‍टूबर, 2019 को अपनी नियुक्ति के बाद से ही अध्‍यक्ष विवेक वासनिक ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए कई भ्रष्‍टाचार किए हैं। उन्‍होंने कहा कि, अध्‍यक्ष के उपयोग हेतु वाहन के भुगतान में बड़ी गड़बड़ी की गई है। अपनी ही पत्‍नी की संस्‍था को लाभ पहुंचाने का मामला तो जग-जाहिर हो चुका है। इसके अलावा भी कई ऐसे मामले हैं जिनमें उनकी भूमिका पर सवाल उठते हैं।

उन्‍होंने कहा कि राजाओं की विरासत का उपयोग जनसेवा, खेलकूद में प्रतिभाओं को सामने लाने सहित कई उद्देश्‍यों की पूर्ति को लेकर गठित राजगामी संपदा न्‍यास का अध्‍यक्ष विवेक वासनिक के कार्यकाल में पूर्णत: स्‍वरुप ही बदल दिया गया है। राजगामी संपदा न्‍यास के मद का खुलकर दुरुपयोग किया जा रहा है। अध्‍यक्ष स्‍वयं अपनी संस्‍था, परिजन और चुने हुए चेहरों को लाभ दिला रहे हैं। दूसरी ओर राजगामी संपदा की ओर से पूर्व के वर्षों में होते आ रहे आयोजनों पर विराम लगा दिया गया है। जबकि इनमें से कई आयोजन संस्‍कारधानी की पहचान बन चुके थे। कुलमिलाकर लोकहित में इस्‍तेमाल किए जाने वाले रियासत के खजाने की लूट-खसोट की जा रही है।

अपने बयान में नेता प्रतिपक्ष किशुन यदु ने कहा कि न्‍यास अध्‍यक्ष हेतु जिस वाहन के किराए के नाम पर लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं वह वाहन उनके द्वारा इस्‍तेमाल ही नहीं किया जा रहा है। टोयोटा इनोवा के नाम पर 22 मार्च 2020 से लेकर 03 अक्‍टूबर 2020 तक ही उक्‍त गाड़ी के लिए दो लाख 24 हजार 250 रुपए किया गया। उन्‍होंने इस मामले में सीधे भ्रष्‍टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि अध्‍यक्ष के दस्‍तखत वाले देयक पत्र में भी गाड़ी के नंबर या मॉडल का उल्‍लेख नहीं किया गया। साफ है कि, किसी दूसरी ही गाड़ी का इस्‍तेमाल करने वाले अध्‍यक्ष न्‍यास के मद का दुरुपयोग कर रहे हैं। किराए के वाहन के नाम पर ही राजगामी के मद से लाखों रुपए का भ्रष्‍टाचार किया गया।

उन्‍होंने कहा कि न्‍यास के मद से खर्च को लेकर न्‍यास अध्‍यक्ष के फैसले सीधे तौर पर पैसों की बर्बादी है। जहां एक ओर जनसेवी संस्‍थाओं, समितियों द्वारा अनुदान की मांग को अस्‍वीकार कर दिया गया। वहीं अध्‍यक्ष ने अपनी ही पत्‍नी की संस्‍था को 50 हजार का अनुदान दे डाला। इस अनुदान को लेकर विवाद इसलिए भी है क्‍यूंकि अनुदान किसी और के ही आधिपत्‍य वाले भवन के लिए दिया गया। गौरतलब है कि विवेक वासनिक की पत्‍नी श्रीमती कविता वासनिक ने यह अनुदान दिग्विजय कॉलेज के आधिपत्‍य वाले सृजन संवाद भवन के रखरखाव, प्रशिक्षण/रियाज प्रारंभ करने हेतु मांगा था। कुल मिलाकर अनुदान के मसलों पर भी न्‍यास अध्‍यक्ष द्वारा भेदभाव और स्‍वयं की संस्‍था, परिजनों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।

श्री यदु ने कहा कि इसी तरह महाधिवक्‍ता से मशविरा लेने के एवज में दो लाख का भुगतान किए जाने की तैयारी भी आश्‍चर्यजनक है। उन्‍होंने कहा कि राजगामी शासकीय संस्‍था है और शासन द्वारा ही नियुक्‍त महाधिवक्‍ता से मशविरा लेने के बदले दो लाख का भुगतान किया जाना हैरान करने वाला है। उन्‍होंने यह भी कहा कि महाधिवक्‍ता से क्‍या सलाह ली गई और उस पर क्‍या अमल किया गया और उसका कितना फायदा न्‍यास को मिला इसकी कोई जानकारी ही नहीं है। इस पूरे मसले पर जवाब देने से अध्‍यक्ष वासनिक भी कतरा रहे हैं। उन्‍होंने आरोप लगाया कि निजी हित साधने वाले विषयों पर राय लेकर वासनिक उसका भुगतान राजगामी के मद से करना चाह रहे हैं जो कि गलत है।

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