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राजनांदगांव : गौठान ग्राम बघेरा एवं बोईरडीह के स्वसहायता समूह की महिलाओं को एक दिवसीय बटेर एवं मुर्गीपालन का दिया गया प्रशिक्षण

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 बटेर पालन में कम स्थान एवं दाने की होती है आवश्यकता
– बटेर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मुर्गी की तुलना में अच्छी

कलेक्टर श्री तारन प्रकाश सिन्हा के निर्देश पर गौठानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पशुधन विकास विभाग एवं वेटनरी पॉलीटेक्निक कॉलेज के संयुक्त तत्वाधान में वेटनरी पॉलीटेक्निक कॉलेज प्रांगण में गौठान ग्राम बघेरा एवं बोईरडीह के स्वसहायता समूह की महिलाओं को एक दिवसीय बटेर एवं मुर्गीपालन प्रशिक्षण दिया गया। उप संचालक पशु चिकित्सा सेवायें राजनांदगांव एवं प्राचार्य वेटनरी पॉलीटेक्निक कॉलेज बोरी राजनांदगांव के नेतृत्व में मुर्गी एवं बटेरपालन प्रशिक्षण विशेषज्ञों की टीम द्वारा प्रदाय किया गया। प्रशिक्षण में महिलाओं को मुर्गी एवं बटेर पालन के लिए आवश्यक तकनीकी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के आयोजन हेतु जनपद पंचायत राजनांदगांव का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।
    गौरतलब है कि बटेर एक ऐसी पक्षी है जो कि 5-6 सप्ताह में परिपक्व हो जाता है। बटेर पालन में मात्र 5 से 6 सप्ताह में आमदनी मिलने लगती है। बटेर को मुर्गी की तुलना में कम स्थान एवं दाने की आवश्यकता होती है। बटेर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मुर्गी की तुलना में अच्छी होने से बटेर में टीकाकरण की आवश्यकता नहीं होती है। प्रति वर्ष बटेर से 250 से 300 अण्डे प्राप्त किया जा सकता है एक दिवसीय चूजे का वजन 7 ग्राम होता है तथा अण्डे का भार 9 से 10 ग्राम होता है।

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