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रायपुर : घास जमीन पर बनी सामुदायिक बाड़ी, 11 स्वसहायता समूहों की महिलाएं उगा रहीं सब्जी

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राज्य शासन की महत्वाकांक्षी नरवा, गरवा, घुरवा, बारी योजना ने धरातल पर अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। लॉक-डाउन में जब चारों ओर सन्नाटा है, तब दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड के बोरेन्दा में नई बनी सामुदायिक बाड़ी महिलाओं की मेहनत से गुलजार है। बोरेन्दा की 11 स्वसहायता समूहों की महिलाएं सुराजी गांव योजना के अंतर्गत साढ़े सात एकड़ में विकसित बाड़ी में सब्जी-भाजी की खेती कर मौजूदा लॉक-डाउन में भी रोजी-रोटी की चिंता से मुक्त हैं। वे इस कठिन समय में अपने परिवार का आर्थिक संबल भी बन रही हैं।

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित स्वसहायता समूहों की महिलाओं की मेहनत से मई की भीषण गर्मी में भी चेच, चौलाई, पटवा, अमारी और खेड़ा भाजी से बाड़ी लहलहा रही है। बाड़ी में टमाटर, बैगन, लौकी, करेला, टिंडा, बरबट्टी और ग्वांरफली की भी पैदावार हो रही है। यह बाड़ी कई महिलाओं को स्व-रोजगार और नियमित आमदनी का जरिया देने के साथ ही बोरेन्दा व आसपास के गांवों में सुपोषण के लिए जैविक तरीके से तैयार सब्जी-भाजी की आपूर्ति कर रही है। सभी समूहों की महिलाओं को भी रोज ताजी सब्जियां और भाजी मिल जाती है। रासायनिक उर्वरक के बदले यहां गौठान में निर्मित गोबर खाद, नाडेप टंकियों और वर्मी कम्पोस्ट खाद का ही उपयोग किया जा रहा है।

सब्जी-भाजी की हरियाली से आज जो जमीन लहलहा रही है, वह कुछ महीने पहले तक घास जमीन थी। नरवा, गरवा, घुरवा, बारी योजना के तहत गांव की बाहरी सीमा से लगी हुई साढ़े सात एकड़ घास जमीन को सामुदायिक बाड़ी के रूप में विकसित किया गया है। मनरेगा के अभिसरण से इसे तैयार करने के दौरान ग्रामीणों को सीधे रोजगार भी मिला। सब्जी उत्पादन के लिए 11 महिला स्वसहायता समूहों के तैयार हो जाने के बाद उन्हें जनपद पंचायत के माध्यम से प्रशिक्षण दिलवाया गया। उद्यानिकी विभाग द्वारा निःशुल्क बीज और थरहा उपलब्ध कराया गया।

बोरेन्दा की इस सामुदायिक बाड़ी में जानकी स्वसहायता समूह, मेरे राम स्वसहायता समूह, जय मां दुर्गा स्वसहायता समूह तथा जय मां ज्वाला स्वसहायता समूह के साथ सात और समूहों की महिलाएं सब्जी की खेती कर रही हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए समूहों की महिलाएं एक-दूसरे से सामाजिक और शारीरिक दूरी बनाकर काम कर रही हैं। मास्क या कपड़े से मुंह ढंककर रखने के साथ ही वे हाथ धुलाई एवं साफ-सफाई के बारे में भी जागरूक हैं। महिलाओं की जीवटता और मेहनत से कम समय में ही बाड़ी से अच्छी आमदनी हो रही है। लॉक-डाउन के कठिन समय में ये महिलाएं अपनी एकजुटता, परिश्रम और उद्यमिता से रोजगार व आर्थिक चुनौतियों का सफलता से मुकाबला कर रही हैं।

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