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फसल का श्रेष्ठ बीज किसान आगामी फसल के लिए रखता है – मुनि सम्यक रतन सागर

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राजनांदगांव आठ जनवरी। जैन मुनि सम्यक रतन सागर जी ने आज यहां कहा कि किसान अपनी फसल का श्रेष्ठ बीज आगामी फसल के लिए बचा कर रखता है। उन्होंने कहा कि किसान को भी इतनी समझ है कि जो कुछ मैं धरती को दूंगा उससे कहीं ज्यादा मैं धरती से पाऊंगा। इससे मेरे परिवार के साथ – साथ पूरे विश्व के लोगों को अन्न मिलेगा। उन्होंने कहा कि धरती को वह जो कुछ देता है उससे कहीं ज्यादा वह पाता भी है। इसी तरह मनुष्य जो पुरुषार्थ करता है, उससे कहीं ज्यादा वह पाता है।
     मुनि श्री सम्यक रतन सागर जी ने कहा कि शिक्षा का सबसे बड़ा विद्यालय जिन शासन का सत्संग है, जहां नैतिकता परोपकार एवं संस्कार की शिक्षा मिलती है। उन्होंने कहा कि विद्यालय में केवल शिक्षा ही मिलेगी , जबकि सत्संग में वह सब कुछ मिलता है जो व्यक्ति को एक अच्छा मनुष्य बनाने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चिकित्सालय तो रोग आने पर ही इलाज करते हैं, परंतु सद्गुरु रोग आने से पहले इलाज करते हैं और मन के अंदर की सब मैल को बाहर कर देतें हैं। इसे अनुभव करने की जरूरत होती है, देखने के लिए चमड़े के चक्षु की जरूरत नहीं होती। मुनिश्री ने कहा कि जीवन में सुख का आधार है धर्म। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जितने भी तर्क हैं वह सब नर्क के नेशनल हाईवे हैं। जिनालय पावर हाउस है।
     मुनिश्री ने कहा कि शादी से पहले परिवार तो नहीं बिखरता फिर शादी के बाद ऐसा क्या हो जाता है कि परिवार बिखर जाता है। उन्होंने कहा कि सास बहू के झगड़े में बेटे बाप को नहीं पड़ना चाहिए और बेटे बाप के झगड़े में सास बहू को नहीं पड़ना चाहिए इसके अलावा बच्चों के झगड़े में भी बड़ों को नहीं पड़ना चाहिए । उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होगा तो परिवार बिखरने से बच जाएगा। उन्होंने कहा कि बिना प्रभु की कृपा के जीवन में कभी सुख नहीं मिलता।

जिस वृक्ष की शीतल छाया में आप बैठे हैं, उसे पानी देना ना भूले – नरेश डाकलिया

जिनालय निर्माण हेतु हुआ भूमि पूजन

श्री जैन श्वेतांबर पार्श्वनाथ मंदिर के निर्माण हेतु आज आचार्य श्री जिन पीयूष सागर जी की उपस्थिति में भूमि पूजन हुआ।जिनालय के निर्माण हेतु सहयोग देने की इच्छा भी जैन समाज के लोगों ने जाहिर की।इससे पूर्व जैन बगीचे में आयोजित धर्म सभा के दौरान संघ के मैनेजिंग ट्रस्टी नरेश डाकलिया ने कहा कि जिस वृक्ष की शीतल छाया में आप बैठे हैं , उसे पानी देना कभी ना भूले। यह छाया मिली है धर्म – पुण्य के कारण। उन्होंने कहा कि जब एक किसान अपनी फसल का श्रेष्ठ बीज आगामी फसल के लिए रखता है तो फिर हम अपनी फसल का श्रेष्ठ बीज धर्म के लिए क्यों नहीं रख सकते। संपत्ति बुरे वक्त पर काम नहीं आती बल्कि बुरे वक्त पर धर्म ही काम आता है। भक्ति से ही मुक्ति संभव है। हमारी भक्ति भगवान के चरणों में हमेशा बनी रहनी चाहिए।

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