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 इंदौर मेें सवा सौ साल बाद अप्रैल में झमाझम बारिश, ओले भी बरसे

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इंदौर में रविवार को एक इंच से ज्यादा बारिश हो गई। अप्रैल में हल्की बूंदा-बांदी और रिमझिम बाारिश तो होती रही है, लेकिन दो दिनों में शहर पर मानसून के दौर की तरह बादल बरस रहे है। यह बाारिश सोयाबीन की फसल के लिए भी फायदेमंद होगी, क्योंकि अगले माह से उसकी बुआई होगी। बारिश के कारण जमीन में नमी रहेगी, जो फसल के लिए मददगार रहेगी। बायपास की काॅलोनियों में ओले भी बरसे। पश्चिम विक्षोभ के कारण बारिश
अप्रैैल में तेज बारिश इंदौर ही नहीं मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में हो रही है। पश्चिम विक्षोभ के कारण मध्य प्रदेश में हवा के साथ नमी आ रही है।अरब की खाड़ी और  बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी बारिश की वजह बन रही है। इस कारण पारा लुढ़क रहा है। मौसम विभाग के अनुसार मई मेें भी मौसम में उतार-चढ़ाव रहेगा। हवा को रुख भी दक्षिण-पश्चिम होने से बारिश हो रही है। 40 प्रतिशत भी नहीं छू पाया पारा
अप्रैल में भी गर्मी के तेवर ज्यादा तीखे नहीं थेे। पूरे माह पारा 40 डिग्री को छू नहीं पाया। 15 अप्रैल को अधिकतम पारा 38.8 डिग्री सेल्सियस रहा। शनिवार को पारा लुढ़कर कर 31 डिग्री पर आ गया। रविवार को भी पारा 30 डिग्री के नीचे रहा। जबलपुर की उड़ान डायवर्ट, रातभर इंदौर में रुके यात्री
मौसम की खराबी की वजह से हैदराबाद से जबलपुर के लिए उड़ा विमान इंदौर के लिए डायवर्ट करना पड़ा। रात विमान की लैडिंग हुई। जबलपुर जाने वाले यात्री रातभर इंदौर मेें रुके। इसके अलावा रविवार सुबह मुबंई से इंदौर आए विमान को मौसम की खराबी की वजह से हवा में दस मिनट तक चक्कर लगाना पड़े। विमान सुबह 7.20 इंदौर के आसपास पर था, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण विमान दस मिनट तक हवा में चक्कर काटता रहा। इसके बाद साढ़े सात बजे लैडिंग हुई। जबलपुर की उड़ान डायवर्ट, रातभर इंदौर में रुके यात्री
मौसम की खराबी की वजह से हैदराबाद से जबलपुर के लिए उड़ा विमान इंदौर के लिए डायवर्ट करना पड़ा। रात विमान की लैडिंग हुई। जबलपुर जाने वाले यात्री रातभर इंदौर मेें रुके। इसके अलावा रविवार सुबह मुबंई से इंदौर आए विमान को मौसम की खराबी की वजह से हवा में दस मिनट तक चक्कर लगाना पड़े। विमान सुबह 7.20 इंदौर के आसपास पर था, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण विमान दस मिनट तक हवा में चक्कर काटता रहा। इसके बाद साढ़े सात बजे लैडिंग हुई।फसलों के लिए फायदेमंद
कृषि विभाग के उपसंचालक एसएस राठौर के अनुसार मालवा-निमाड़ में मई में सोयाबीन की बुआई होती है। मिट्टी में नमी रहने से सोयाबीन की खेती अच्छी रहेगी। गेहूं अधिकांश खेतों में निकल कर मंडियों तक पहुंच गए हैं। अभी खाली खेतोंं में जो खर-पतवार है। वह भी बारिश के कारण नष्ट हो गई। कई किसानों ने प्याज भी बो रखेे है। उनके लिए भी बारिश फायदेमंद है। 

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