भोपाल
प्रदेश सरकार ने महिलाओं और बच्चों के सशक्तीकरण तथा संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल की है। महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने विभाग के अंतर्गत आने वाले द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारियों, यानी विकासखंड महिला सशक्तिकरण अधिकारियों के पदों के पारदर्शी और सुचारू व्यवस्थापन के लिए तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।
बढ़ते कार्यक्षेत्र में मैदानी अधिकारियों की अहम भूमिका
महिला एवं बाल विकास मंत्री भूरिया ने बताया कि विभाग के लगातार बढ़ते कार्यक्षेत्र और नवीन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को ध्यान में रखते हुए मैदानी अमले की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। एकीकृत बाल विकास सेवा और महिला सशक्तिकरण संचालनालय के एकीकरण के बाद भी योजनाओं के दायरे में कोई कमी नहीं की गई है, बल्कि कई नई जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू की गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुसार मैदानी अमले प्रभावी उपयोग राज्य सरकार की प्राथमिकता है, जिससे ज़मीनी स्तर पर पर्यवेक्षण और क्रियान्वयन को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।
नया सेटअप और प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था
मंत्री भूरिया ने कहा कि प्रशासनिक पुनर्व्यवस्थापन की इस योजना के तहत विकासखंड महिला सशक्तिकरण अधिकारियों के पदों को संचालनालयों, महिला-बाल संरक्षण संस्थाओं, संभागीय व जिला कार्यालयों, क्षेत्रीय समन्वय कार्यालयों और प्रशिक्षण केंद्रों के सेटअप में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही विभिन्न आयोगों और निगमों में आवश्यकतानुसार कतिपय पदों को प्रतिनियुक्ति (Deputation) के लिए आरक्षित रखने की व्यवस्था भी की जा रही है। मंत्री भूरिया ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पदों के प्रतिस्थापन, प्रतिनियुक्ति के लिये आरक्षण और सेटअप में शामिल करने की प्रक्रिया यथाशीघ्र पूरी की जाए।
भर्ती नियमों की समीक्षा और दूरगामी प्रभाव
मंत्री भूरिया ने विभाग को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए विभागीय भर्ती नियमों की समीक्षा करने तथा विभागीय सेटअप को सुव्यवस्थित करने के भी आदेश दिए हैं। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल विभागीय तालमेल में सुधार होगा, बल्कि मैदानी स्तर पर निगरानी मजबूत होने से कुपोषण नियंत्रण, बाल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के सकारात्मक परिणाम और अधिक प्रभावी ढंग से सामने आएंगे।
