भोपाल : मंगलवार, अगस्त 4, 2026, 20:33 IST
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार और प्रदेश सरकार ने मिलकर ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन स्थापित किया है। गत ढाई वर्ष में राज्य सरकार की उद्योग अनुकूल नीतियों– नियमों के कारण मध्यप्रदेश में लगभग हर क्षेत्र में अभूतपूर्व निवेश प्राप्त हुआ है। यह क्रम निरंतर जारी है। पिछले ढाई वर्षों में राज्य सरकार ने उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिये अनेक निवेश अनुकूल और आकर्षक नीतियां लागू की हैं। इन नीतियों से मध्यप्रदेश को देश–विदेश के निवेशकों का अभूतपूर्व विश्वास प्राप्त हुआ है और बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव मिले हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत का यह विश्वास प्रदेश की पारदर्शी नीतियों और सुशासन का सबसे बड़ा प्रमाण है। मध्यप्रदेश सभी सेक्टर्स में तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। देश–दुनिया के निवेशकों का भरोसा हमारे साथ है। भारत और दुनिया की सबसे सस्ती बिजली मध्यप्रदेश में मिलती है। औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए कौशल युक्त श्रमिक मध्यप्रदेश में उपलब्ध हैं। अगर रोजगार आधारित उद्योग शुरू किये जाएं तो सरकार 5 से 10 वर्ष तक वेतन में भी सहयोग प्रदान करती है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मुम्बई में टेलीकॉम मैन्युफेक्चरिंग जोन, ग्वालियर में उद्योगपति और निवेशकों को आमंत्रित करने के लिये आयोजित राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 'मेक इन एमपी' और 'फेथ इन एमपी' के विश्वास पर पिछले दिनों दिल्ली में हुई पहली राउंड टेबल मीटिंग में 3 हजार 500 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले, जिसके फलस्वरूप 14 हजार लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। यह केंद्र और राज्य सरकार के साथ पहली इन्वेस्टर राउंड टेबल मिटिंग थी, जिसमें अभूतपूर्व सफलता मिली। मध्यप्रदेश सरकार ने देश के अलग–अलग शहरों में निवेश आकर्षित करने के लिए रोड–शो आयोजित किए हैं। मध्यप्रदेश सभी औद्योगिक घरानों और निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। एक बार जो यहां आकर व्यापार–व्यवसाय करता है, यहां की निवेश उन्मुख सुविधाओं और शासन–प्रशासन की सुविधाओं से प्रभावित होकर मध्यप्रदेश का ही बनकर रह जाता है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का दिल है, पूर्व–पश्चिम–उत्तर–दक्षिण कोई किसी भी दिशा में जाएं, मध्यप्रदेश से जरूर गुजरता है। मध्यप्रदेश की कानून व्यवस्था सबसे बेहतर है। यहां श्रमिकों की समस्या नहीं है। भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की सफलता के बाद अगले वर्ष फिर जीआईएस-2027 का आयोजन होने जा रहा है। नर्मदापुरम जिले में बाबई–मोहासा में इलेक्ट्रिकल उपकरण पार्क में भूमि–पूजन के दिन ही 1000 एकड़ क्षेत्र में भूखंड आवंटित हो गए। धार जिले में विकसित हो रहा पीएम मित्र पार्क, टेक्सटाइल सेक्टर का देश का सबसे बड़ा क्लस्टर है। यहां भी भूमि–पूजन के होते ही सभी भूखंड आवंटित हो गए। लगभग 170 एकड़ क्षेत्र में प्लग एंड प्ले मॉडल पर विकसित किये जाना वाला टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन देश का पहला इंटीग्रेटेड टेलीकॉम टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम बनकर उभरेगा। यह महत्वाकांक्षी परियोजना दूरसंचार विनिर्माण, अनुसंधान, डिजाइन, टेस्टिंग एवं इनोवेशन को एक ही परिसर में विकसित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन एक नई और विशेष सौगात है, जो नई दिल्ली–एनसीआर से ज्यादा दूर नहीं है। ग्वालियर शहर को सिंधिया राजघराने का भी सहयोग मिलता रहा है। बदलते दौर में राज्यों के बीच सौहार्द्रपूर्ण संबंध बनाते हुए मध्यप्रदेश ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। तीन राज्यों के साथ नदी जोड़ो परियोजना के अनुबंध करके जल प्रबंधन के कार्य किए जा रहे हैं। राजस्थान के साथ करीब 40 साल पुराने जल बंटवारे के विवाद को आपसी सहमति से हल करते हुए पार्वती–कालीसिंध–चंबल परियोजना पर हम आगे बढ़ रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार सभी क्षेत्रों में भारत सरकार के सहयोग से कार्य करते हुए प्रदेश के तीव्र विकास के लिए कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज मध्यप्रदेश में एमएसएमई, विनिर्माण, इंजीनियरिंग, रक्षा उत्पादन, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स सहित अनेक क्षेत्रों में तेज़ी से निवेश बढ़ रहा है। ‘मेक इन एमपी’ और ‘मेड इन एमपी’ जैसे अभियान उद्योग जगत का व्यापक विश्वास अर्जित करने में सफल रहे हैं। दिल्ली में आयोजित पहले राउंड टेबल मीटिंग सहित विभिन्न निवेशक बैठकों और रोड–शो के माध्यम से प्रदेश को बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे बड़ी संख्या में रोजगार सृजन की संभावनाएं बनी हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी विशेषता केवल उसकी भौगोलिक स्थिति नहीं, बल्कि निवेशकों के प्रति सरकार की साझेदारी की भावना है। राज्य सरकार उद्योगों को केवल स्थापित नहीं कराती, बल्कि उनके दीर्घकालिक विकास और विस्तार में भी सहभागी बनती है। यही कारण है कि प्रदेश के औद्योगिक पार्कों और क्लस्टर्स को निवेशकों का लगातार उत्कृष्ट प्रतिसाद मिल रहा है। साथ ही भूमि आवंटन और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय गति आई है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन दूरसंचार उद्योग के लिए आधुनिक अधोसंरचना, बेहतर आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक स्तर की विनिर्माण सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। इससे निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा भारत की डिजिटल और औद्योगिक प्रगति को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से आग्रह किया कि वे मध्यप्रदेश को अपने उद्योगों के विस्तार का विश्वसनीय भागीदार बनाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मध्यप्रदेश में निवेश करने का यही सबसे उपयुक्त समय है। मध्यप्रदेश आइए, हमारे विकास के सहभागी बनिए और विकसित भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाइए।
ग्वालियर टीएमजेड में कम्पनियों का निवेश
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कंपनी का नाम |
सम्भावित निवेश (करोड़ रु में) |
संभावित रोज़गार |
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एम. वी. इलेक्ट्रोसिस्टम्स |
700 |
1500 |
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अनंत सिस्टम्स |
400 |
500 |
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स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज़ लिमिटेड |
200 |
1200 |
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वी एन टी |
150 |
– |
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टेसकॉम |
100 |
400 |
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कुल |
1550 |
3600 |
मुख्यमंत्री ने वेलस्पन वर्ल्ड के चेयरमैन श्री बी.के. गोयनका से भेंट कर केन–बेतवा परियोजना से जुड़े विभिन्न आयामों एवं संभावित औद्योगिक अवसरों पर विचार–विमर्श किया। साथ ही यूमेडिका लेबोरेट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक श्री प्रतीक कोठारी के साथ बैठक में कंपनी द्वारा पीथमपुर एसईजेड में फार्मास्यूटिकल निर्माण सुविधा स्थापित करने के लिये लगभग 350 से 500 करोड़ रूपये के प्रस्तावित निवेश पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने KRYFS Power Components Ltd. के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक श्री सैफुद्दीन कुरैशी से भेंट कर कंपनी की निवेश एवं विस्तार योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान बताया गया कि कंपनी को सीहोर में भूमि आवंटित की जा चुकी है तथा कंपनी द्वारा वहां ट्रांसफॉर्मर कंपोनेंट्स निर्माण इकाई की स्थापना के लिये लगभग 1000 करोड़ रूपये के निवेश की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। प्रस्तावित परियोजना के माध्यम से 2,000 से अधिक रोजगार अवसरों के सृजन की संभावना है। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने गोदरेज इंडस्ट्रीज समूह के ग्रुप प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट अफेयर्स) श्री राकेश स्वामी के साथ भी विस्तृत चर्चा कर मध्यप्रदेश में औद्योगिक विस्तार, नए निवेश अवसरों तथा विभिन्न क्षेत्रों में संभावित सहयोग की संभावनाओं पर विचार–विमर्श किया।
भारत के दूरसंचार क्षेत्र और डिजिटलाइजेशन में आई क्रांति : केन्द्रीय मंत्री श्री सिंधिया
केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 साल में भारत के दूरसंचार क्षेत्र और डिजिटलाइजेशन में नई क्रांति देखने को मिली है। पहले भारत 2 जी पर निर्भर रहता था, आज हमारा देश विश्व का दूसरा बड़ा टेलीकॉम आत्मनिर्भर देश बन चुका है। भारत में 5 जी सेक्टर में वर्तमान समय में 50 करोड़ से अधिक उपभोक्ता हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भविष्य की जरूरतों के मुताबिक 130 साल पुराने टेलीकॉम एक्ट में परिवर्तन किए और देश को आधुनिक टेलीकॉम आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एक रोडमैप और रन–वे प्रदान किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 'लोकल फॉर वोकल' को प्रमोट किया है। उनकी सोच है– मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड। उनके नेतृत्व में हम सभी विकसित भारत @ 2047 के संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं। विकसित भारत के विजन में टेलीकॉम सेक्टर एक सेंट्रल नर्वस सिस्टम (सीएनएस) की तरह है।
केंद्रीय मंत्री श्री सिंधिया ने कहा कि यह विकास के एक अदृश्य हाइवे की तरह है। प्रधानमंत्री श्री मोदी भारत को सर्विस आधारित देश से प्रोडक्ट वाले देश के रूप में परिवर्तित करना चाहते हैं। देश में कभी 5 करोड़ फोन बनते थे और हमें अपनी जरूरत के 85 प्रतिशत फोन दूसरे देशों से आयात करने पड़ते थे। आज भारत में प्रतिवर्ष 33 करोड़ फोन तैयार होते हैं। एपल जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनी के लगभग 20 प्रतिशत फोन भारत में निर्मित हो रहे हैं। आज भारत में यूपीआई से 20 बिलियन डिजिटल ट्रांजेक्शन हो रहे हैं। हमने 9 देशों को यूपीआई टेक्नोलॉजी दी है। ग्वालियर के टीएमजेड में टेलीकॉम सेक्टर की लिए जरूरी इको सिस्टम उपलब्ध होगा।
केन्द्रीय मंत्री श्री सिंधिया ने कहा कि भारत सरकार टेलीकॉम सेक्टर के निवेशकों को प्लग एंड प्ले फैसिलिटी उपलब्ध कराना चाहती है। मध्यप्रदेश सरकार इसके लिए आगे आई है। यहां दूरसंचार मंत्रालय और मध्यप्रदेश सरकार ने मिलकर ग्लोबल स्टैंडर्ड और बेस्ट इन क्लास फैसिलिटी तैयार करने का संकल्प लिया है। पहले फेज के लिए 170 एकड़ जमीन उपलब्ध है। निवेशकों को 2 रुपए प्रति यूनिट बिजली दी जाएगी। बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए 5000 रुपए प्रति श्रमिक वेतन सहायता, कौशल उन्नयन के लिए 13 हजार रुपए प्रति कर्मचारी सब्सिडी दी जाएगी। ग्वालियर में शीघ्र ही टेलीकॉम मेन्यूफेक्चरिंग जोन का भूमि–पूजन होगा। नई दिल्ली के आयोजन के बाद 17 कंपनियां निवेश के लिए पहल कर चुकी हैं।
देश का पहला समर्पित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन ग्वालियर : केन्द्रीय सचिव श्री अग्रवाल
सचिव, केन्द्रीय दूरसंचार श्री अमित अग्रवाल ने कहा कि मुंबई रोड–शो भारत के टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग मिशन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। ग्वालियर का टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन देश का पहला समर्पित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन है। उन्होंने कहा कि केंद्र और मध्यप्रदेश सरकार की साझेदारी से प्रदेश में टेलीकॉम सेक्टर को नई दिशा मिल रही है। श्री अग्रवाल ने उद्योगों से ग्वालियर में निवेश कर भारत की विकास यात्रा का हिस्सा बनने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वस्तरीय टेस्टिंग एवं मैन्युफैक्चरिंग इको सिस्टम विकसित करने पर बल देते हुए कहा कि इससे आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को गति मिलेगी और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि टीएमजेड के विकास से निवेश, नवाचार और रोजगार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
टीएमजेड में निवेशकों को मिलेंगी सभी सुविधाएं
अपर मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय एवं औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री नीरज मंडलोई ने कहा कि मध्यप्रदेश में आकर निवेश करने का आमंत्रण निवेशकों को दिया गया है। ग्वालियर में बनने वाले टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन से देश में संचार उपकरणों के निर्माण में सहयोग मिलेगा यह अद्वितीय पहल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में उद्योग अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए छोटे–छोटे शहरों में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित कीं। इसका सुखद परिणाम ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस 2025) में प्राप्त हुआ। राज्य में 30 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आया। इसका 30 प्रतिशत अब तक धरातल पर आ चुका है। सेक्टर बेस्ड औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की दिशा में अब तक ग्वालियर में टेलीकॉम मेन्यूफेक्चरिंग जोन, धार जिले में पीएम मित्र पार्क और नर्मदापुरम जिले के बाबई–मोहासा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तैयार करने के लिए ठोस कार्य हुआ है।
एसीएस श्री मंडलोई ने कहा कि ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन केंद्र सरकार के सहयोग से तैयार हो रहा है। बिजली, पानी और जमीन सस्ती दरों पर उपलब्ध होगी। यह क्षेत्र देश के मध्य में होने के साथ–साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लगभग 300 किमी दूरी पर स्थित है। टीएमजेड पार्क के प्रथम चरण के विकास के लिए कुल 170 एकड़ जमीन उपलब्ध है। दूसरे चरण के लिए 400 एकड़ अतिरिक्त भूमि पर विस्तार के लिए विचार किया जा रहा है। यहां 6 स्पेशल टेस्टिंग लैब उपलब्ध होंगी। निवेशकों के लिए 1 रुपए प्रति वर्ग मीटर लीज पर औद्योगिक और 50 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही निवेशकों को 5000 रुपए प्रति श्रमिक मासिक वेतन में भी सहायता प्रदान की जाएगी। निवेशक 12 हजार करोड़ का निवेश करते हैं, तो मध्यप्रदेश सरकार 8 हजार करोड़ सब्सिडी के रूप में लौटाएगी। यहां 10 हजार से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इस अवसर पर टेलीकॉम सेक्टर के निवेशक और औद्योगिक घरानों के अनेक प्रतिनिधि उपस्थित थे।
स्केल–अप प्रोडक्शन के लिए मध्यप्रदेश द्वारा निवेशकों को दिया जाने वाला प्रोत्साहन
- पूंजी अनुदान : पात्र निवेश पर अधिकतम 50 प्रतिशत तक पूंजी अनुदान, जिसकी अधिकतम सीमा 200 करोड़ रुपये होगी।
- अनुसंधान एवं विकास सहायता।
- स्वतंत्र अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं के लिए परियोजना लागत का 25 प्रतिशत अथवा अधिकतम 25 करोड़ रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी।
- संस्थान के भीतर किए जाने वाले अनुसंधान एवं विकास पर होने वाले व्यय को भी स्थायी पूंजी निवेश के अंतर्गत पात्र माना जाएगा।
- प्रशिक्षण सहायता : प्रत्येक नए कर्मचारी के प्रशिक्षण के लिए 13 हजार रुपये तक की सहायता उपलब्ध होगी। यह सुविधा अधिकतम 4 हजार कर्मचारियों तक प्रदान की जाएगी।
- रोजगार प्रोत्साहन : प्रत्येक कर्मचारी के लिए प्रतिमाह 5 हजार रुपये तक का रोजगार प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जाएगा।
- निर्यात मालभाड़ा सहायता : समुद्री बंदरगाहों एवं हवाई माल परिवहन के माध्यम से होने वाले निर्यात पर मालभाड़ा व्यय का 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति की जाएगी। इसके अंतर्गत प्रति वर्ष अधिकतम 40 लाख रुपये तथा प्रति इकाई अधिकतम 2 करोड़ रुपये तक की सहायता 5 वर्षों के लिए उपलब्ध होगी।
- हरित विनिर्माण प्रोत्साहन : अपशिष्ट प्रबंधन पर होने वाले व्यय का 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति का प्रावधान है। इसके अंतर्गत अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (ईटीपी) की स्थापना के लिए अधिकतम 5 करोड़ रुपये तथा शून्य द्रव अपशिष्ट निष्कासन प्रणाली के लिए भी अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी।
परियोजना की व्यवहार्यता बढ़ाने के लिए विशेष प्रोत्साहन
- भूमि प्रीमियम: मात्र 1 रुपये की नाममात्र दर पर भूमि प्रीमियम का प्रावधान।
- वार्षिक लीज़ किराया: 1 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से वार्षिक लीज़ किराया, जो 30 वर्षों तक स्थिर रहेगा।
- स्टाम्प शुल्क प्रतिपूर्ति: स्टाम्प शुल्क की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति उपलब्ध होगी।
- विकास शुल्क: विकास शुल्क का भुगतान 30 वर्षों की अवधि में किया जा सकेगा।
- विद्युत सहायता: उद्योगों को संचालन के प्रारंभिक 5 वर्षों तक विद्युत शुल्क में 2 रुपये प्रति यूनिट की रियायत प्रदान की जाएगी।
- जल शुल्क: जल आपूर्ति के लिए 25 रुपये प्रति किलोलीटर की रियायती दर लागू होगी।
