राजनांदगांव , शहर और अंचल में स्कूल के साफ, सुंदर कमरों में अब प्राचार्यों, एचएम और शिक्षकों का किसी तरह कब्जा और स्टाफ रूम नहीं रहेगा। इन कमरों में बच्चों की क्लासेस लगेगी। शिक्षकों को इस नई व्यवस्था को लागू करने कहा गया है। बच्चों की नियमित क्लासेस और पढ़ाई को प्राथमिकता देंगे। स्कूल में अगर कोई कमरा बिना उपयोग बंद पड़ा हुआ है तो बच्चों की क्लास लेने और शिक्षकों के बैठने के लिए दुरूस्त किया जाएगा। इस नई व्यवस्था में शिक्षकों को सहयोग करने और मैनेज करने कहा गया है।
शिक्षा विभाग के अफसरों तक जिले के कई ऐसे स्कूलों से शिकायतें पहुंची है कि हॉल, बरामदे, कक्ष साफ, सुंदर और पर्याप्त होने के बाद भी वहां कुछ शिक्षक स्वयं बैठते है। कई बड़े हॉल और कमरों को प्राचार्य और एचएम, शिक्षकों, स्टाफ रुम बना दिया गया है। ऐसे में बच्चों की दर्ज संख्या ज्यादा होने पर एक साथ बिठा कर क्लासेस लेने समस्या होती है। कई कमरों में सालों से खराब फर्नीचर, कबाड़ सामान और दस्तावेज रखें है। कुछ कमरे जर्जर होने से उपयोग नहीं होते संस्था प्रमुखों को इसमें सुधार लाने के लिए कहा गया है।
डीईओ प्रवास सिंह बघेल ऑनलाइन अटेंडेंस, सीजी स्कूल पोर्टल, सीएम हेल्पलाइन, शिक्षकों की निलंबन-बहाली, न्यायालयीन प्रकरण, स्कूलों की सुविधाओं और विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं की स्थिति, डीपीआर, प्राक्कलन की स्थिति, स्कूलों में बालिका शौचालय निर्माण की स्थिति की समीक्षा करेंगे। शिक्षकीय, गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों और अफसरों की ऑनलाइन अटेंडेंस की समीक्षा होगी। सीएम हेल्पलाइन से आवेदनों के निराकरण, दो सालों में निलंबन, बहाली की समीक्षा की जाएगी।
तिमाही परीक्षा की तैयारी को लेकर शिक्षकों से पूछेंगे प्लानिंग: न्यायालय के मामलों में किए जवाबदावों की स्थिति विभागीय स्तर पर लंबित मामलों और उन पर हुई कार्रवाई की समीक्षा होगी। आगामी परीक्षाओं को देख पाठ्यक्रम की पूर्णता, ब्लूप्रिंट, सतत मूल्यांकन और तिमाही परीक्षा के अनुसार पाठ्यक्रम की स्थिति की जानकारी ली जाएगी।
दो माह बाद मरम्मत काम शुरू हो सका जिले में करीब 107 स्कूल डिस्मेंटल योग्य है। इसके लिए अलग से बजट नहीं है। हांलाकि इन जर्जर कमरों में क्लासेस नहीं लग रही अलग वैकल्पिक इंतजाम किया गया है। जिले में 531 स्कूलों को मरम्मत की जरूरत है। जुलाई की शुरआत में 64 लाख रुपए की स्वीकृति मिली थी। इसमें मरम्मत का काम अब जाकर शुरू किया गया है। जर्जर छत, प्लास्टर, बाउंड्रीवाल, फ्लोरिंग, फर्श, इसमें डोंगरगढ़, डोंगरगांव और सबसे ज्यादा छुरिया ब्लॉक के स्कूल जर्जर है। डीईओ ने बताया 64 लाख नहीं 47 लाख मिले है।
