CG : ख्याति, पूजा और लाभ की चाहत ही संसार के दुखों का मूल कारण: मुनि आगम सागर …
रायपुर । दिगंबर जैन आदीश्वरधाम नवोदय तीर्थ, बड़ा मंदिर मालवीय रोड, रायपुर में चल रहे ‘समयोपदेश वर्षायोग 2026’ के अंतर्गत गुरुवार को मुनि आगम सागर महाराज ने मिथ्या चारित्र और आत्म-कल्याण के मार्ग पर मंगल देशना दी। उन्होंने कहा कि ख्याति, पूजा और लाभ की लालसा ही मिथ्या चारित्र है और यही जीव को बार-बार संसार चक्र में भटकाने का कारण बनती है।
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज एवं वर्तमानाचार्य समय सागर महाराज के मंगल आशीर्वाद से उनके आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि आगम सागर महाराज ससंघ का वर्षायोग रायपुर में चल रहा है। 18 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद रायपुर जैन समाज को मुनि संघ के सानिध्य में धर्मलाभ का अवसर प्राप्त हुआ है।
आकुलता रहित सुख ही है आत्मा का वास्तविक सुख
प्रातःकालीन धर्मसभा में ‘छह ढाला’ की तीसरी ढाल और तत्त्वार्थ सूत्र की कक्षा के दौरान मुनिश्री ने कहा कि आत्मा का वास्तविक हित सच्चे सुख की प्राप्ति में है। सच्चा सुख वही है, जिसमें किसी प्रकार की आकुलता न हो। उन्होंने कहा कि संसार में मिलने वाले सभी सुखों में किसी न किसी रूप में आकुलता जुड़ी रहती है।
मुनिश्री ने बताया कि मनुष्य गति हो, देव गति हो या पशु गति, संसार में आकुलता बनी रहती है। केवल मोक्ष का मार्ग ही पूर्णतः आकुलता से रहित है। सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक्चारित्र को उन्होंने मुक्ति की मंजिल तक पहुंचने का साधन बताया।
समय कम हो रहा, सही दिशा चुनना जरूरी
पंचम काल की वर्तमान स्थिति का उल्लेख करते हुए मुनि आगम सागर ने कहा कि पूर्व में मनुष्य की आयु 120 वर्ष मानी जाती थी, जो निरंतर घट रही है और आने वाले समय में और कम होगी। इसलिए जीव को समय रहते सही मार्ग चुन लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि रास्ता सही होना चाहिए, गति कम या अधिक होने से फर्क नहीं पड़ता। दिशा सही होगी तो मंजिल तक पहुंचना निश्चित है।
अभिषेक, शांतिधारा और स्वाध्याय का आयोजन
वर्षायोग के तहत गुरुवार को सुबह 7:30 बजे मूलनायक भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। त्रिकाल चौबीसी में प्रतिमा विराजमान करने वाले पुण्यार्जक परिवार सीए विनय कुमार जैन, श्रीमती सरोज जैन, अदिश जैन, श्रीमती अंजना जैन एवं आनवी जैन परिवार को यह सौभाग्य प्राप्त हुआ। वहीं मूलनायक भगवान के समक्ष अभिषेक एवं शांतिधारा का लाभ विमल कुमार जैन, श्रीमती सुषमा जैन एवं अंशुल जैन परिवार ने लिया।
सुबह 8 बजे मुनि आगम सागर द्वारा तत्त्वार्थ सूत्र एवं छह ढाला की कक्षा आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने स्वाध्याय का लाभ लिया। सुबह 9:30 बजे नवधाभक्ति के साथ मुनि संघ को आहारदान कराया गया।
मुनि आगम सागर को आहारदान का सौभाग्य श्रीमती प्रज्ञा माधव जैन, मुनि पुनीत सागर को रोशनी दीदी एवं शौर्य दीदी, एलक धैर्य सागर को श्रीमती पुष्पादेवी बंशीलाल जैन तथा एलक स्वागत सागर को श्रीमती रीता निर्मल जैन एवं श्रीमती आशु नीरज जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
समयोपदेश वर्षायोग 2026 समिति एवं सकल दिगंबर जैन समाज रायपुर ने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से प्रतिदिन परिवार सहित मंदिर पहुंचकर जिनवाणी, स्वाध्याय, आरती एवं गुरु-सेवा का लाभ लेने का आह्वान किया है।
