Durg :- शिवनाथ नदी के महमरा तट पर नदी संरक्षण, वृक्षारोपण एवं जल संसाधन प्रबंधन को लेकर समग्र अभियान
मनीष त्रिपाठी पत्रकार
सेवा संकल्प अभियान-
सेवा मेरा योगदान अंतर्गत तांदुला जल संसाधन संभाग दुर्ग की अभिनव पहल
दुर्ग, / शिवनाथ नदी के तटवर्ती पर्यावरण के संरक्षण, जल स्त्रोतों के प्रदूषण की रोकथाम, हरित आवरण के संवर्धन तथा जल संसाधनों के सतत एवं विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति सामुदायिक उत्तरदायित्व विकसित करने के उद्देश्य से सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत तांदुला जल संसाधन संभाग, दुर्ग द्वारा ग्राम महमरा स्थित शिवनाथ नदी तट पर स्वच्छता, वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण का समन्वित अभियान संचालित किया गया। अभियान में नदी तट की स्वच्छता को ठोस अपशिष्ट नियंत्रण, तटवर्ती पारिस्थितिकी संरक्षण एवं जनभागीदारी से संबद्ध करते हुए व्यापक स्वरूप प्रदान किया गया।
अधीक्षण अभियंता सह कार्यपालन अभियंता आशुतोष सारस्वत के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में अनुविभागीय अधिकारी गौरव सिंह, रोहन शॉ एवं कुलेश्वर जोशी सहित विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा श्रमदान करते हुए नदी तट एवं समीपस्थ क्षेत्र से प्लास्टिक, पॉलीथिन एवं अन्य ठोस अपशिष्ट का निष्कासन किया गया। इस कार्यक्रम में नगर निगम दुर्ग के सभापति श्याम शर्मा, महेन्द्र लोढ़ा, राम चंद सेन, संजय अग्रवाल, लीलाधर पाल, कुलेश्वर साहू, जीतू महोबिया, तुलसी यादव उपस्थित रहे। इस पहल का उद्देश्य नदी में बाह्य अपशिष्ट के प्रवेश की रोकथाम के साथ जल स्त्रोत की पर्यावरणीय गुणवत्ता एवं तटवर्ती क्षेत्र की स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता को सुदृढ़ करना रहा।
अभियान के अंतर्गत नदी तट पर वृक्षारोपण भी किया गया। तटवर्ती हरित आवरण का संवर्धन मृदा अपरदन के नियंत्रण, सतही अपवाह के विनियमन, तटीय स्थायित्व तथा स्थानीय जैव-विविधता एवं पारिस्थितिक संतुलन के संरक्षण में सहायक है। इस दृष्टि से वृक्षारोपण को केवल पौधरोपण गतिविधि न मानकर नदी तट के पर्यावरणीय पुनसंवर्धन एवं दीर्घकालीन संरक्षण के प्रयास के रूप में लिया गया।
इस अवसर पर ग्रामीणों एवं स्थानीय नागरिकों को अवगत कराया गया कि नदी संरक्षण का दायरा केवल नदी की धारा एवं तट की स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जलागम क्षेत्र, वर्षाजल संरक्षण, सतही बहाव के नियमन, स्थानीय जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा जल उपयोग दक्षता से भी प्रत्यक्ष रूप से संबद्ध है। नागरिकों से नदी एवं अन्य जल स्त्रोंतों में प्लास्टिक, कचरा अथवा अपशिष्ट का निष्पादन नहीं करने, वर्षा जल के संरक्षण तथा जल के अनावश्यक अपव्यय को नियंत्रित करने का आह्वान किया गया।
अभियान के दौरान यह संदेश प्रमुखता से दिया गया कि जल संसाधनों का संरक्षण एक सतत सामुदायिक उत्तरदायित्व है, जिसमें शासन, विभागीय तंत्र एवं स्थानीय समुदाय की सहभागिता आवश्यक है। स्थानीय ग्रामीणों एवं नागरिकों ने स्वच्छता एवं वृक्षारोपण गतिविधियों में उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए नदी एवं जल स्त्रोतों के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस प्रकार अभियान को एक दिवसीय गतिविधि के स्थान पर पर्यावरणीय संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन, जनभागीदारी एवं दीर्घकालीन जल सुरक्षा से जोड़ने का प्रयास किया गया।
तांदुला जल संसाधन संभाग, दुर्ग का स्पष्ट संदेश है कि जल संरक्षण केवल जल की बचत नहीं, बल्कि जल स्त्रोतों को प्रदूषण से सुरक्षित रखना, नदी तट एवं जलागम क्षेत्र की पारिस्थितिक संरचना का संरक्षण, हरित आवरण का संवर्धन, वर्षाजल का समुचित संरक्षण तथा उपलब्ध जल का दक्ष एवं सतत उपयोग सुनिश्चित करने की समग्र प्रक्रिया है। वर्तमान में संरक्षित जल संसाधन एवं पर्यावरणीय संपदा ही भविष्य की जल सुरक्षा की आधारशिला है।


