रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के देवपुरी इलाके में वाहन को साइड देने को लेकर हुए विवाद के बाद युवक पर चाकू से जानलेवा हमला करने के मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। रायपुर के तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश शैलेश शर्मा की अदालत ने आरोपी वीरेंद्र कुमार बिसेन उर्फ बाहु को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 सहपठित धारा 34 के तहत दोषी ठहराते हुए 7 वर्ष के सश्रम कारावास और 2 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। इसके अलावा धारा 323 सहपठित धारा 34 के अंतर्गत 500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। यह मामला वर्ष 2019 में टिकरापारा थाना क्षेत्र के देवपुरी स्थित यूनियन बैंक के पास हुई मारपीट और चाकूबाजी की घटना से संबंधित है।
साइड नहीं देने पर शुरू हुआ था विवाद अभियोजन के अनुसार, घटना 24 और 25 मई 2019 की दरमियानी रात करीब 12:30 बजे की है। निर्मल रायकवार अपने दोस्त इंद्रजीत को छोड़ने के लिए विनोद देवांगन के साथ जा रहा था। इसी दौरान पीछे से आ रहे टाटा योद्धा वाहन में सवार लोगों ने हॉर्न बजाया और साइड देने को लेकर विवाद शुरू कर दिया। आरोपियों ने वाहन के पास पहुंचकर साइड नहीं देने की बात पर गाली-गलौज की। विनोद देवांगन ने इसका विरोध किया तो विवाद मारपीट में बदल गया। अभियोजन के अनुसार, वाहन में सवार लोगों ने नीचे उतरकर विनोद के साथ हाथ-मुक्कों से मारपीट शुरू कर दी।
फोन कर साथी को बुलाया, फिर हुआ चाकू से हमला अदालत में प्रस्तुत अभियोजन के मामले के मुताबिक, विवाद के दौरान वीरेंद्र कुमार बिसेन ने आकाश साल्वे उर्फ अक्कू को फोन करके घटनास्थल पर बुलाया। इसके बाद विनोद देवांगन पर चाकू से हमला किया गया। हमले में विनोद के पेट पर दो से तीन वार किए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के दौरान निर्मल रायकवार को भी चोटें आई थीं। घायल को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार किया गया। चिकित्सकीय साक्ष्यों के अनुसार, विनोद देवांगन को गंभीर प्रकृति की चोटें आई थीं और समय पर इलाज नहीं मिलने की स्थिति में उसकी मृत्यु भी हो सकती थी।
टिकरापारा पुलिस ने दर्ज किया था मामला घटना के बाद टिकरापारा थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 307 सहपठित धारा 34 के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और नक्शा तैयार किया। मौके से रक्तयुक्त मिट्टी तथा अन्य साक्ष्य जब्त किए गए। विवेचना के दौरान घटना में प्रयुक्त धारदार चाकू और टाटा योद्धा वाहन को भी जब्त किया गया। इसके अलावा घायलों के कपड़े, चिकित्सकीय दस्तावेज और गवाहों के बयान जांच में शामिल किए गए। विवेचना पूरी होने के बाद आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।
घायल के बयान और मेडिकल रिपोर्ट बने महत्वपूर्ण साक्ष्य न्यायालय ने मामले में घायल विनोद देवांगन और निर्मल रायकवार के बयानों का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि दोनों घायलों के कथनों को चिकित्सकीय एवं अन्य साक्ष्यों से समर्थन मिलता है। विनोद देवांगन ने आरोपियों को पहचानने और हमले के घटनाक्रम के संबंध में बयान दिया था। अदालत के समक्ष यह तथ्य भी आया कि घटनास्थल पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था थी और घायल विनोद आरोपियों को पहले से जानता था। चिकित्सकीय साक्ष्यों से यह पुष्टि हुई कि विनोद को आई चोटें गंभीर थीं। अदालत ने हमले में इस्तेमाल हथियार, शरीर के जिस हिस्से पर वार किया गया और चोट की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए हत्या के प्रयास के आरोप को प्रमाणित माना। वीरेंद्र बिसेन को 7 साल का सश्रम कारावास तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश शैलेश शर्मा ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करने के बाद आरोपी वीरेंद्र कुमार बिसेन उर्फ बाहु को धारा 307/34 और 323/34 के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने सजा सुनाते समय अपराध की गंभीरता, आरोपी के विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्य और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखा। बचाव पक्ष ने आरोपी की उम्र और उसके चालक के रूप में कार्य करने का उल्लेख करते हुए पूर्व में जेल में बिताई अवधि तक सजा सीमित रखने का अनुरोध किया था। वहीं, अपर लोक अभियोजक राहुल गुप्ता ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए अधिकतम सजा देने की मांग की। न्यायालय ने आरोपी को धारा 307 सहपठित धारा 34 में सात वर्ष का सश्रम कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही धारा 323/34 में 500 रुपये अर्थदंड लगाया। कुछ आरोपों से दोषमुक्त भी किया गया अदालत ने सभी आरोपों को एक समान प्रमाणित नहीं माना। निर्णय के अनुसार, इंद्रजीत से संबंधित धारा 323/34 और आपराधिक धमकी से संबंधित धारा 506 भाग-दो के आरोपों को अभियोजन पक्ष संदेह से परे साबित नहीं कर सका। इस कारण वीरेंद्र कुमार बिसेन को उन आरोपों से दोषमुक्त किया गया। हालांकि, निर्मल रायकवार के साथ मारपीट और विनोद देवांगन पर जानलेवा हमले से संबंधित धाराओं में आरोपी की दोषसिद्धि हुई। न्यायालय के आदेश के अनुसार, मामले में अन्य आरोपी रामखिलावन उर्फ राजा नेताम और नागेश्वर के संबंध में 6 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाया जा चुका है। उन्हें भी संबंधित अपराध में दोषी ठहराया गया था। वहीं, आरोपी आकाश साल्वे उर्फ अक्कू को न्यायालय के आदेश में फरार बताया गया है। इसी वजह से जब्त संपत्ति और वस्तुओं के संबंध में फिलहाल कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया गया है। आरोपी को केंद्रीय जेल रायपुर भेजने का आदेश न्यायालय ने दोषसिद्ध आरोपी वीरेंद्र कुमार बिसेन के खिलाफ सजा वारंट तैयार कर उसे दंड भुगतने के लिए केंद्रीय जेल रायपुर भेजने का निर्देश दिया। साथ ही पूर्व में न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को निर्धारित कारावास की सजा में समायोजित करने का आदेश दिया गया। अदालत ने आरोपी को निर्णय के विरुद्ध कानूनी अपील और निःशुल्क विधिक सहायता के अधिकार से भी अवगत कराया। इस तरह वर्ष 2019 में सड़क पर साइड देने के मामूली विवाद से शुरू हुई मारपीट और जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।