CG : अवैध रेत खनन मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, JCB ऑपरेटर को 3 साल की कठोर कैद...
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अरपा नदी के नगोई घाट पर बिना अनुमति रेत उत्खनन करने के मामले में दोषी पाए गए जेसीबी ऑपरेटर अनिल कुमार गौलिया को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। न्यायालय ने दोषी पर एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इसके अलावा खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत 25 हजार रुपये का अतिरिक्त अर्थदंड लगाया गया है। इस तरह दोनों अर्थदंडों की कुल राशि 26 हजार रुपये है। यह मामला जून 2025 में अरपा नदी के नगोई घाट पर हुई कार्रवाई से जुड़ा है। प्रशासन की संयुक्त टीम ने बिना अनुमति रेत उत्खनन करते हुए जेसीबी वाहन को लेकर प्रकरण दर्ज किया था। इसके बाद न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत सुनवाई हुई और आरोपी को दोषी ठहराया गया।
अरपा नदी के नगोई घाट पर हो रहा था अवैध रेत उत्खनन जानकारी के अनुसार, बिलासपुर जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से विशेष अभियान शुरू किया गया था। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर 15 जून 2025 से जिले में अवैध खनन के खिलाफ अभियान चलाया गया। इसके अंतर्गत खनिज विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीमों ने विभिन्न क्षेत्रों में जांच और कार्रवाई की। इसी अभियान के दौरान 17 जून 2025 को अरपा नदी के नगोई घाट पर अवैध रूप से रेत उत्खनन किए जाने का मामला सामने आया। जांच में पाया गया कि नदी से बिना वैध अनुमति के जेसीबी मशीन की सहायता से रेत निकाली जा रही थी। मामले में संबंधित वाहन और ऑपरेटर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
JCB क्रमांक CG 11 AB 3246 से की जा रही थी खुदाई प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान नगोई घाट पर जेसीबी वाहन क्रमांक CG 11 AB 3246 के माध्यम से रेत उत्खनन करने का मामला दर्ज किया गया था। संयुक्त टीम ने मौके पर सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए संबंधित प्रकरण पुलिस के पास भेजा। इसके बाद मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई। बिना अनुमति नदी से रेत निकालना खनन संबंधी नियमों का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। जेसीबी ऑपरेटर अनिल कुमार गौलिया दोषी करार इस प्रकरण में करगीरोड कोटा के डाकबंगला निवासी अनिल कुमार गौलिया, पिता तिलक राम गौलिया, के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। न्यायालय ने प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर अनिल कुमार गौलिया को दोषी पाया।
अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303(2), सहपठित धारा 3(5) के तहत दोषी को तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। अदालत का यह फैसला जिले में अवैध खनन से जुड़े मामलों में की जा रही कानूनी कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खनिज अधिनियम के तहत अलग से 25 हजार रुपये जुर्माना न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के अतिरिक्त खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत भी अर्थदंड लगाया है। अधिनियम की धारा 4(1), 4(1क) और 21 के तहत दोषी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। इस प्रकार अनिल कुमार गौलिया पर कुल 26 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसमें एक हजार रुपये भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत और 25 हजार रुपये खनिज अधिनियम के तहत शामिल हैं। अवैध खनन के खिलाफ 66 मामलों में दर्ज हुई थी FIR बिलासपुर जिले में अवैध खनन के खिलाफ शुरू किए गए विशेष अभियान के दौरान प्रशासन ने व्यापक स्तर पर कार्रवाई की थी।
खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमों ने जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में अवैध उत्खनन, खनिज परिवहन और भंडारण से जुड़े मामलों की जांच की। प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, इस अभियान के परिणामस्वरूप जिले के विभिन्न पुलिस थानों में कुल 66 प्रकरणों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इन मामलों में कानून के अनुसार आगे की जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया संचालित की जा रही है। अरपा नदी में अवैध खनन पर प्रशासन की निगरानी बिलासपुर जिले की अरपा नदी स्थानीय पर्यावरण और जल संसाधनों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। नदी में अनियंत्रित रेत उत्खनन से जलधारा, नदी तल और आसपास के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। नदी से खनिजों का उत्खनन निर्धारित नियमों और आवश्यक अनुमति के अनुसार किया जाना जरूरी है।
अवैध उत्खनन रोकने के लिए संबंधित विभागों की ओर से निरीक्षण और निगरानी की कार्रवाई की जाती है। इस तरह के अभियानों का उद्देश्य नियमों का पालन सुनिश्चित करना और बिना अनुमति खनिजों के दोहन पर रोक लगाना है। अवैध रेत उत्खनन करने वालों के लिए सख्त संदेश अरपा नदी के नगोई घाट से जुड़े इस मामले में तीन साल के कठोर कारावास और कुल 26 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाए जाने से अवैध खनन के मामलों में कानूनी कार्रवाई का महत्व सामने आया है। यह प्रकरण जून 2025 में दर्ज किया गया था। सुनवाई के बाद न्यायालय ने दोषी के खिलाफ निर्णय सुनाया है। जिले में अवैध खनन रोकने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत दर्ज अन्य मामलों में भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इस फैसले से स्पष्ट है कि बिना वैध अनुमति खनिजों का उत्खनन करने पर संबंधित व्यक्तियों को आर्थिक दंड के साथ कारावास की सजा का भी सामना करना पड़ सकता है।
