रायपुर : छत्तीसगढ़ की प्रख्यात शिक्षाविद्, साहित्यकार, समाजसेवी और पंडित सुंदरलाल शर्मा राज्य अलंकरण से सम्मानित डॉ. सत्यभामा आडिल के निधन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने डॉ. आडिल के निधन को प्रदेश के शैक्षणिक और साहित्यिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए उनके योगदान को श्रद्धापूर्वक याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा, साहित्य, समाजसेवा और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में उनकी सेवाएं सदैव स्मरणीय रहेंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने शोक संदेश में कहा कि डॉ. सत्यभामा आडिल के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने के लिए प्रभु श्रीराम से प्रार्थना की।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने डॉ. सत्यभामा आडिल के निधन पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा, साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि डॉ. आडिल का निधन छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक एवं साहित्यिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने प्रार्थना की कि प्रभु श्रीराम दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों और शुभचिंतकों को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश का समापन ‘ॐ शांति’ के साथ किया।
शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में रहा उल्लेखनीय योगदान डॉ. सत्यभामा आडिल का नाम छत्तीसगढ़ के साहित्यिक और शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़ा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, उन्होंने शिक्षा के साथ साहित्य, समाजसेवा और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। डॉ. आडिल के कार्यों की पहचान राज्य स्तर पर भी हुई। हिंदी साहित्य में योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2024 के पंडित सुंदरलाल शर्मा राज्य सम्मान के लिए चुना गया था। छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग की आधिकारिक सम्मान सूची में भी उनका नाम वर्ष 2024 की सम्मान प्राप्तकर्ता के रूप में दर्ज है।
पंडित सुंदरलाल शर्मा सम्मान से किया गया था सम्मानित छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से साहित्य और आंचलिक साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्यकारों को पंडित सुंदरलाल शर्मा सम्मान प्रदान किया जाता है। डॉ. सत्यभामा आडिल को वर्ष 2024 में इस प्रतिष्ठित राज्य सम्मान के लिए चुना गया था। इस सम्मान का उद्देश्य साहित्यिक सृजन और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों की उपलब्धियों को मान्यता देना है। डॉ. आडिल को यह सम्मान मिलना उनके साहित्यिक योगदान की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल रहा। महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में भी योगदान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने शोक संदेश में महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में डॉ. सत्यभामा आडिल के योगदान का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनकी सेवाएं सदैव याद रखी जाएंगी। शिक्षा और साहित्य समाज में जागरूकता बढ़ाने, विचारों के आदान-प्रदान और महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। डॉ. आडिल ने अपने कार्यों के माध्यम से इन क्षेत्रों में योगदान दिया। उनके निधन से प्रदेश ने एक सम्मानित शिक्षाविद् और साहित्यिक व्यक्तित्व को खो दिया है। छत्तीसगढ़ की साहित्यिक विरासत से जुड़ा रहा नाम छत्तीसगढ़ साहित्य, लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं की समृद्ध विरासत के लिए जाना जाता है। प्रदेश के अनेक साहित्यकारों ने हिंदी और छत्तीसगढ़ी साहित्य को नई पहचान दिलाने में योगदान दिया है। डॉ. सत्यभामा आडिल भी प्रदेश के साहित्यिक क्षेत्र में सम्मानित व्यक्तित्व के रूप में पहचानी जाती थीं। वर्ष 2024 में उन्हें पंडित सुंदरलाल शर्मा सम्मान के लिए चुना जाना उनके योगदान की औपचारिक मान्यता थी। उनके निधन पर मुख्यमंत्री द्वारा व्यक्त शोक संदेश प्रदेश के साहित्य और शिक्षा क्षेत्र में उनके महत्व को रेखांकित करता है। शोकाकुल परिजनों के प्रति मुख्यमंत्री ने व्यक्त की संवेदना मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने डॉ. सत्यभामा आडिल के निधन पर उनके परिवार और शुभचिंतकों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए कहा कि उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा। डॉ. आडिल का निधन छत्तीसगढ़ के शिक्षा, साहित्य और समाजसेवा क्षेत्र के लिए दुखद समाचार है। उनकी साहित्यिक उपलब्धियां और समाज के प्रति सेवाएं प्रदेश की सांस्कृतिक स्मृतियों में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।