राजनांदगांव , मेडिकल कॉलेज में बर्न यूनिट नहीं है, ऐसे में दिवाली पर्व के दौरान पटाखे जलाते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। एक सामान्य बर्न यूनिट में सीमित संसाधनों से काम चल रहा है। यहां सर्जरी विभाग के डॉक्टरों की सेवा ली जाती है। लेकिन सामान्य बर्न यूनिट में मेडिकल मशीनरी और इलाज में उपयोग आने वाले उपकरण नहीं होने से मरीजों का प्राथमिक इलाज के बाद रेफर करना मजबूरी है।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अतुल देशकर ने बताया आग लगने की घटना के शिकार लोगों का इलाज करने सर्व सुविधायुक्त बर्न यूनिट तो नहीं है। लेकिन एक अलग वार्ड तैयार किया गया है। यहां सर्जरी विभाग के डॉक्टरों द्वारा जले हुए मरीज को राहत देने प्राथमिक इलाज किया जाता है। मेडिकल कॉलेज के सेटअप के अनुसार स्टाफ की कमी प्रमुख कारण है, शासन को कई बार अवगत कराया जा चुका है। केवल बर्न यूनिट में 4 सर्जन, एसोसिएट, असिस्टेंट सहित अन्य मिला कर दर्जनभर से ज्यादा स्टाफ की जरूरत पड़ती है। सुविधा जुटाए जाने को लेकर प्रयासरत हैं।
राहत देने यूनिट को सुविधाओं की जरूरत झुलसे हुए मरीजों के लिए बर्न यूनिट में जलन से राहत देने, इलाज, संक्रमण से बचाव और रिकवरी के लिए जरुरी सुविधा होना जरुरी है। इसमें एक विशेष गहन चिकित्सा यूनिट, संक्रमण रोकने एयर सिस्टम और निगेटिव, पॉजिटिव प्रेशर वाला आइसोलेशन रुम, ड्रेसिंग, सफाई, स्किन ग्राफ्टिंग के लिए अलग ऑपरेशन थिएटर होना चाहिए, स्नान करने हाइड्रो थैरेपी सुविधा, वेंटिलेटर, अन्य आवश्यक उपकरण जरूरी है।
