0 मंदिर में हैंड सेनीटाइजर की व्यवस्था व भक्तों को मास्क लगाकर आने की अनिवार्यता रखी गई
मां शक्ति की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र आज से शुरू हो गया है। राजनांदगांव जिले के देवी मंदिरों मंे भक्तों का तांता लगा हुआ है। 17 से 25 अक्टूबर तक चलने वाले इस नवरात्रि पर्व में कोरोना काल के चलते खास इंतजाम किए गए हैं। राजनांदगांव शहर के मां पाताल भैरवी मंदिर में हैंड सेनीटाइजर की व्यवस्था की गई है तो वही भक्तों को मास्क लगाकर आने की अनिवार्यता रखी गई है।

राजनंदगांव शहर के सिद्ध शक्तिपीठ मां पाताल भैरवी मंदिर में कोरोना कॉल की वजह से भक्तों के सुरक्षात्मक तैयारियों के बीच नवरात्र प्रारंभ हो गया है। प्रतिवर्ष नवरात्र के अवसर पर मां पाताल भैरवी मंदिर में छत्तीसगढ़ सहित भारत के विभिन्न राज्यों से भक्तगण यहां मां के दर्शन के लिए पहुंचे थे, लेकिन इस वर्ष कोरोना को देखते हुए मंदिर समिति के द्वारा विभिन्न माध्यमों से अपील की गई है कि मंदिर परिसर में बच्चे और बुजुर्गों को साथ ना लाएं। मंदिर समिति ने यहां भंडारा व प्रसादी वितरण को भी शासन के गाइडलाइन के अनुसार प्रतिबंधित किया हुआ है। वहीं शरद पूर्णिमा के अवसर पर स्वास-दमा के लिए बांटी जाने वाली जड़ी-बूटी युक्त खीर का वितरण किया जाता था, मंदिर समिति ने इस वर्ष शरद पूर्णिमा के अवसर पर खीर वितरण को भी स्थगित कर दिया है। मंदिर समिति के सचिव गणेश प्रसाद शर्मा का कहना है कि मंदिर में श्रद्धालुओं के द्वारा 1 हजार 5 सौ 50 मनोकामना ज्योतिकलशों की स्थापना कराई गई है।

नवरात्रि के प्रथम दिवस यहां छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से भी दर्शनार्थी मां पाताल भैरवी के दर्शन के लिए पहुंचे जहां उन्होंने ने अपने परिवार के सुख समृद्धि की कामना भी की। वहीं श्रद्धालुओं के द्वारा यहां पर मनोकामना ज्योति कलशों की स्थापना भी करवाई गई है।
राजनांदगांव शहर के मां पाताल भैरवी मंदिर में पाताल लोक में मां पाताल भैरवी की प्रतिमा स्थापित है, तो वहीं भूलोक में राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी दसमहाविद्या की प्रतिमाएं स्थापित की गई है। वहीं मंदिर के आकाश लोक में भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा के ईद-गिर्द द्वादश ज्योतिर्लिंग स्थापित है। एक ही परिसर में मां पाताल भैरवी, दसमहाविद्या और द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शनों का लाभ यहां आने वाले श्रद्धालुओं को मिलता है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
