राजनांदगांव / छुईखदान । हिंदुओं का सबसे बड़ा पर्व दीपावली को अब मात्र 15 दिन ही शेष है। इस पर्व पर सभी व्यवसायियों को अपने व्यवसाय से काफी उम्मीदें रहती हैं। इसके अलावा दीपावली के पूर्व लोग अपने निवास की साफ-सफाई एवं आकर्षक रंगों से पुताई कराने में व्यस्त रहते हैं। साथ ही घरों में रखे अनुपयोगी सामानों को कबाड़ियों के पास बेच देते हैं। इसके चलते वर्तमान में कबाड़ियों का धंधा जोरशोर से चल रहा है। वहीं अभी इस धंधे में और तेजी आने की उम्मीद इसके व्यवसायियों को है। कबाड़ की आड़ में कई लोग चोरी की सामानों को भी बेच देते हैं, ऐसे मामले कई बार आ चुके हैं, बावजूद इस सीजन में कबाड़ सामानों की पुलिस द्वारा जांच नहीं की जा रही है।
इस पर्व में नगर एवं कस्बे से घुमंतू परिवारों द्वारा गांव-गांव में घूमकर कबाड़ खरीदा जाता है। जिसमें अनुपयोगी लोहे, प्लास्टिक, टीना आदि के सामान होते हैं। वहीं ऐसा वर्ग नगर में स्थाई रूप से झोपड़ी बनाकर निवास करते हैं। अनेक अवसरों पर कबाड़ियों के कबाड़ की जांच किए जाने पर ऐसी सामग्री कबाड़ियों के पास मिल जाती है जो चोरी से छोटे घुमंतू कबाड़ियों द्वारा बड़े कबाड़ के व्यवसायियों के पास बेची गई रहती है। प्रगतिशील किसानों द्वारा अपने फसलों के लिए खेतों में मोटर पंप पाइप जो आबादी क्षेत्र से बाहर लगे हुए होते हैं, उस मोटर पंप एवं पाइप की चोरी की अनेक घटनाएं पुलिस तक पहुंच चुकी है। साथ ही क्षेत्र में लगे हैंडपंप सहित विभिन्ना वाहनों के सामान भी कबाड़ी द्वारा सस्ते दर में खरीद कर बड़े कबाड़ियों को बेची जाती है, ऐसे मामले भी आ चुके हैं। नगर में कबाड़ी का होलसोल व्यवसाय करने वाला कबाड़ी है जो खरीदे गए कबाड़ को एकत्रित कर दूसरे शहर के कबाड़ियों को ट्रकों से भेजते हैं। लेकिन पुलिस द्वारा इन कबाड़ी सामानों की जांच नहीं की जा रही है।
कबाड़ की जांच में कोताही
कबाड़ी द्वारा कबाड़ से एकत्रित किए गए कबाड़ सामग्री की निष्पक्षतापूर्वक जांच कर कबाड़ में मिले आपत्तिजनक सामग्री बेचने वालों की पहचान की जाए ताकि यह पता चल सके कि आपत्तिजनक सामग्री उन्हें कहां से मिली है। साथ ही बेचने वालों की तत्परता से जांच की जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर होना संभावित है। पुलिस की यह जिम्मेदारी है किंतु पुलिस की कोताही से ही आपत्तिजनक सामग्री ट्रकों से दूसरे शहरों के कबाड़ियों के पास सुरक्षित रूप से पहुंच जाती है। यदि वह चोरी की सामग्री हुई तो प्रमाणित नहीं हो पाता।
बिना लाइसेंस के चल रहा करोड़ों का धंधा
बिना लाइसेंस और प्रशासन की अनुमति के बिना भी होता है करोड़ों का कारोबार।इस कारोबार में किसी का नहीं है नियंत्रण। धड़ल्ले से फल-फूल रहा है अवैध कारोबार। छोटे बच्चों को धंधे में लगा कर धकेल रहे अपराध की दुनिया में। जिले में दो दर्जन से अधिक कबाड़ के व्यवसायी हैं। जो साल में करोड़ों का कारोबार करते हैं।
जिले में इन दिनों धड़ल्ले से कबाड़ियों का अवैध कारोबार चल रहा है। इस व्यवसाय को करने के लिए न तो किसी को लाइसेंस की जरूरत होती है और न ही किसी की अनुमति की आवश्यकता होती है। इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सिर्फ एक स्टाक रजिस्टर की जरूरत होती है। स्टॉक रजिस्टर में खरीद-बिक्री किए गए समान को दर्ज कर इस व्यवसाय को आसानी से किया जा सकता है। इस व्यवसाय में पुलिस और प्रशासन का कोई रोकटोक नहीं होता है।
