विवेकानन्द जी के दृष्टिकोण पर आधारित नई शिक्षा नीति होगी गेम चेंजर- रवि सिन्हा
राजनादगांव- शासकीय शिवनाथ विज्ञान महाविद्यालय में युवा उत्सव के रूप में स्वामी विवेकानंद जी की जयंती डॉ निर्मला उमरे प्राचार्य के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सेवा योजना व इतिहास विभाग के तत्वाधान में मनाया गया ।
मुख्य अतिथि के रूप में श्री रवि सिन्हा अध्यक्ष जन भागीदारी समिति रहे, विशेष अतिथि के रूप में महाविद्यालय जन भागीदारी समिति के सदस्यगण उपस्थित रहे ।

सर्वप्रथम स्वामी विवेकानंद जी के तैलचित्र पर माल्यार्पन व द्वीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने “हम होंगे कामयाब” गीत गाया राष्ट्रीय सेवा योजना के एस आर कन्नौजे ने कहा कि “एकम सत् विप्र बहुदा वदंति” अर्थात सत्य एक है दार्शनिक इसे विभिन्न नाम से पुकारते हैं। स्वामी विवेकानंद के भारतीय धर्मनिरपेक्षता के विचार सभी धर्म के लिए समान थे ,उन्होंने सदैव सार्वजनिक संस्कृति के रूप में धार्मिक सहिष्णुता का समर्थन किया क्योंकि वे सद्भाव और शांति चाहते थे उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस रहे, उनसे उन्हे शिक्षा व दीक्षा मिली, डॉक्टर निर्मला उमरे प्राचार्य ने कहा कि वर्ष 2025 का थीम है “राष्ट्र निर्माण की भूमिका में युवा वर्ग” युवा राष्ट्र निर्माण में आगे आए राष्ट्र हम सब के लिए सर्वोपरी है, ।
विशेष अतिथि के रूप में पधारे आर एस नायक पूर्व डीआईजी ने कहा कि स्वामी जी के दार्शनिक विचार संस्कार कर्तव्य परायणता एवं समर्पण की भावना को प्रत्येक विद्यार्थियों को ग्रहण करना चाहिए,भारत युवाओं का देश है विकसित भारत के निर्माण में युवा वर्ग अपना कर्तव्य निभाए।
श्री विनोद डड्डा जन भागीदारी समिति सदस्य ने कहा कि पूरे विश्व में भारतीय शक्ति को स्थापित करने वाले महाशक्ति को नमन किसी का बिगाड़ो मत, किसी की उपेक्षा ना करें किसी से अपेक्षा न रखें, सफलता पर उड़ना मत असफलता पर रुकना मत कर्तव्य पद पर बढ़ते जाना है।
विद्यार्थी परिषद के प्रदेश सह मंत्री श्री अमन ब्रिज नामदेव ने कहा की युवा संकल्पित होकर कार्य करें तो राष्ट्र की उन्नति निश्चित है। कॉलेज के सदस्य विनायक पुरानिक ने राष्ट्रभक्ति हेतु जज्बा जगाने गीत की प्रस्तुत की।
मुख्य अतिथि की आसंदी से रवि सिन्हा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद देश की आर्थिक स्थिति में सुधार करने आध्यात्मिक ज्ञान, नैतिक बल को मजबूत करने में शिक्षा को ही एकमात्र साधन मानते थे उनके शब्दों में शिक्षा मनुष्य को जीवन में संघर्ष के लिए तैयार करने में मदद करती है शिक्षा चरित्रवान परोपकारी और साहसी बनती है आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में नई शिक्षा नीति तैयार की गई है यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति स्वामी विवेकानंद के वैज्ञानिक दृष्टिकोण नैतिक मूल्यों और नए भारत के निर्माण की दृष्टि के अनुरूप है नई शिक्षा नीति में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देना शिक्षा में मातृभाषा को बढ़ावा देना और समावेशी शिक्षा के लिए प्रावधान करने के साथ-साथ व्यावसायिक शिक्षा सहित उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को 2035 तक 50% तक बढ़ाना है इसके साथ-साथ साढे तीन करोड़ नए पद सृजित करना है यह शिक्षा नीति दलितों पिछड़ों के समग्र और समावेशी सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने के लिए स्वामी जी की दृष्टिकोण को आत्मसात करने में एक गेम चेंजर साबित होगी राष्ट्रीय सेवा योजना छात्र ओम गिरी गोस्वामी ने भी अपने विचार रखें इस अवसर पर जनभागिदारी समिति के सदस्य आशीष सूरे, राजेश यादव , मेहुल जाटव, कमलेश प्रजापति ,अनिल सिन्हा, संजय सिंह, दीपक चौहान, तरुण साहू ,नरेंद्र हंसा एवं महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
