बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सिम्स में गलत इंजेक्शन के चलते हुए गर्भपात के मामले को लेकर सोमवार को सुनवाई की। चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच इसे स्वतः संज्ञान जनहित याचिका के तहत सुनवाई कर रही है। अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर ने कलेक्टर की ओर से गठित समिति की एक जांच रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट के अनुसार, गर्भवती महिला को पहले से ही कई चिकित्सकीय जटिलताएं थीं और गर्भपात का कारण कोई दवा या इंजेक्शन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी पूर्व स्थितियां थीं।
रिपोर्ट में कहा गया कि महिला को सबसे पहले कोटा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती किया गया था, जहां से उसे सिम्स रेफर किया गया। सिम्स में इलाज के दौरान सभी चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन किया गया और गर्भपात की प्रक्रिया जानबूझकर नहीं की गई। साथ ही सिम्स के डीन ने भी अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं को लेकर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में जमा की। कोर्ट ने इन रिपोर्टों का अवलोकन करते हुए सिम्स की चिकित्सा प्रणाली पर मंथन किया और आगे की सुनवाई के लिए अगली तिथि निर्धारित की। इससे पूर्व अदालत ने सिम्स की अव्यवस्थाओं को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से जवाब-तलब किया था। बाद में गर्भवती महिला के गर्भपात का मामला भी इसी याचिका से जुड़ गया। कोर्ट की अगली सुनवाई में तय होगा कि सिम्स प्रबंधन और चिकित्सा स्टाफ की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही हुई है या नहीं।
