राजनांदगांव । मेडिकल कालेज अस्पताल परिसर में बने शासकीय आवास जर्जर हो चुके हैं। कभी दीवार तो कभी छत का प्लास्टर गिरने से डाक्टर व स्वास्थ्यकर्मी इतने डर गए हैं कि एक-एककर वहां से जाने लगे। छह ब्लाक वाले आवास में कुल 120 क्वार्टर थे। सभी में अधिकारी-कर्मचारी निवास करते थे। अब मात्र पांच परिवार ही पूरे आवास में बाकी रह गए हैं। जो लोग निवास कर रहे हैं, वे भी मजबूरी में।
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल परिसर में डाक्टरों व विभागीय कर्मचारियों के रहने के लिए आवास बनवा दिए हैं, लेकिन उसे भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। ज्यादातर मकान जर्जर हो चुके हैं। ध्यानकार्षण के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी जर्जर आवासों की मरम्मत पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
चार दशक पहले बने भवन की आज आज तक किसी ने मरम्मत तक नहीं कराई है। किसी की बाउंड्रीवाल कमजोर होकर गिर रही है तो कहीं छत से पानी टकपता है। खास बात यह है कि आवास की मरम्मत के लिए विभाग कई बार लोक निर्माण विभाग को पत्र लिख चुका है, लेकिन आज तक किसी ने इसकी सुध नहीं ली। पुराने आवास में छह ब्लाक हैं, जिनमें लगभग मकान बने हैं। इनमें से एक ब्लाक में पांच परिवार रहते हैं। खराब स्थिति को देखते हुए बाकी लोग दूसरी जगह चले गए।
कभी भी गिरते रहता है मलबा
जब से सरकारी आवास स्वास्थ्य कर्मचारियों को मिला है, मरम्मत पर ध्यान ही नहीं दिया गया। हालात यह हैं कि छत से मलबा कभी भी गिरते रहता है।
सरकारी आवास पूरा जर्जर हो चुका हैं। नया आवास आवंटन के लिए आवेदन दे चुके है, परंतु अब तक नहीं मिला है।
-डा बीके गुप्ता, रहवासी
कई बार इसकी शिकायत मैंने अधीक्षक की है। आज तक सुनवाई नहीं हुई। पता नहीं कब मुझे नया आवास मिलेगा। -गीता तिवारी, नर्स
मैंने सरकारी आवास को खुद घूमकर देख लिया है। वाकई हालत काफी खराब है। नए आवास के लिए शासन को पत्र लिख चुके है, जल्द इंतजार खत्म होने की उम्मीद है। -प्रदीप बैक, अधीक्षक
