नगर निगम ने मोती तालाब के किनारे रहने वाले 90 परिवारों को पांच दिन में जगह खाली करने का नोटिस दिया है। इन्हें योजना के तहत मकान आवंटित किया जा चुका है, जहां विस्थापित किया जाना है। लेकिन पांच दिन में हटने का नोटिस जारी होते ही विरोध भी शुरू हो गया है।
मंगलवार को भाजपा पार्षद दल ने इसे लेकर निगम आयुक्त डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी से मुलाकात की। इस दौरान प्रभावित परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे। भाजपा पार्षदों ने मांग की है कि सभी परिवार रोजी मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं। हाल ही में अनलॉक के बाद ये अपने काम पर लौटे हैं, ऐसे में अचानक इन पर मकान खाली करने का दबाव न बनाया जाए। निगम नेता प्रतिपक्ष किसुन यदु सहित पार्षदों ने कहा कि बारिश के दौरान मकान खाली करना इनके लिए बड़ी चुनौती साबित होगी।
इसे देखते हुए इन परिवारों को बारिश के चार माह के बाद आवंटित मकानों में शिफ्ट होने का समय दिया जाए । भाजपा पार्षदों ने कहा कि पांच दिन के भीतर मकान खाली कर देने का आदेश गरीब परिवारों को परेशान करने वाला है।
पहले खुद की व्यवस्था दुरुस्त करे निगम
नेता प्रतिपक्ष यदु ने कहा कि इस तरह के परिवारों को लखोली में बने आवास में विस्थापित किया जा रहा है। लेकिन जिन मकानों में इन गरीबों को रहने कहा जा रहा है, वहां पहले ही मूलभूत सुविधा नहीं हैं। कुछ दिन पहले 10 परिवारों को शिफ्ट किया गया, जिनके पीने के पानी तक की व्यवस्था बमुश्किल हो रही थी। इसके चलते इन परिवारों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा है। पार्षदों ने मांग की है कि पहले उक्त मकानों में व्यवस्था दुरुस्त की जाए।
पट्टा दिलाने का मिल चुका था आश्वासन
मेाती तालाब के जिस हिस्से से परिवारों को हटाया जा रहा है, वहां चुनाव के वक्त उन्हें पट्टा दिलाने का वादा भी किया जा चुका है। जब कांग्रेस के नेताओं की ओर से ही उन्हें आश्वस्त किया गया था कि सरकार के आते ही सभी 90 परिवारों को पट्टा दिलाया जाएगा । यह भी बड़ी वजह है कि ये परिवार उक्त हिस्से को छोड़कर नहीं जाना चाहते। प्रभावितों का कहना है उन्हें चुनाव के वक्त झूठा वादा कर दिया गया, जब जगह खाली करने की बात कही जा रही है।
