CG : केमिकल मिला जूस और लस्सी बाजार में बेची जा रही …
रायपुर। रायपुर में नकली और मिलावटी खाद्य पदार्थों, खासकर जूस और पनीर (LP Industry, 560kg seized) के खिलाफ खाद्य विभाग ने छापेमार कार्रवाई की है। हाल ही में धमतरी, बालोद और रायपुर में केमिकल (एसिटिक एसिड, पाम ऑयल) से बने नकली पनीर और असुरक्षित खाद्य पदार्थों के खिलाफ एक्शन लिया गया है। प्रशासन ने मिलावटी चीजों को नष्ट किया है।प्रमुख बिंदु:नकली पनीर फैक्ट्री पर छापा: रायपुर में [एलपी इंडस्ट्री] में छापे में 560 किलो से ज्यादा नकली पनीर नष्ट किया गया, जो केमिकल और दूध पाउडर से बन रहा था।प्रशासनिक कार्रवाई: प्रशासन ने फूड सेफ्टी को लेकर सख्त चेतावनी दी है।अन्य सतर्कता: मिलावटी और अस्वच्छ (Unhygienic) खाद्य पदार्थों के खिलाफ लगातार निरीक्षण चल रहा है।आम जनता से अपील है कि वे खुले और संदिग्ध स्थानों से जूस या खाद्य पदार्थ लेने से बचें। यदि मिलावट का संदेह हो, तो तुरंत खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) को सूचित करें।खैरागढ़ में स्वीट, जूस और चाट सेंटर्स पर खाद्य विभाग की लगातार …छत्तीसगढ़ में नकली पनीर के खिलाफ खाद्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूरे मामले का पर्दाफाश किया है। राज्य के धमतरी, बालोद में खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। प्रशासन और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने एल पी इंडस्ट्री में छापा मारकर केमिकल मिलाकर तैयार की जा रही जूस और लस्सी बाजार में बेची जा रही थी —जिसके हर घूंट के साथ लोगों की जान से खेला जा रहा था।
देश भर में गर्मी के मौसम के दौरान सड़क के किनारे बिकने वाले सस्ते जूस और शेक में जहरीली मिलावट के गंभीर मामले सामने आ रहे हैं, जो आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.मुख्य चिंताएं और मिलावट के सबूत:केमिकल युक्त जूस: भोपाल जैसे शहरों में 10-10 रुपये में आम का जूस (Mango Shake) बेचा जा रहा है, जिसमें असली फल की जगह सेकरिन (Saccharin), हानिकारक सिंथेटिक रंग, थिकनर, और आर्टिफिशियल मैंगो फ्लेवर का उपयोग किया जा रहा है.स्वास्थ्य के लिए खतरा: इस तरह के मिलावटी जूस के सेवन से कैंसर, किडनी खराब होने, और पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं.दुर्ग और अन्य स्थानों पर छापे: दुर्ग (छत्तीसगढ़) में 50 से अधिक जूस की दुकानों की जांच में केमिकल रंग और मिलावट का खुलासा हुआ है.अमानवीय कृत्य: गाजियाबाद में जूस में पेशाब मिलाकर बेचने का घिनौना मामला सामने आया, जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है.सावधानियां:सस्ते और खुले में बिकने वाले जूस/शेक से बचें.फल और जूस हमेशा साफ-सुथरी और प्रतिष्ठित दुकान से ही लें।गर्मी से बचने के लिए घर पर बने ताजे जूस या पेय पदार्थों को प्राथमिकता दें।कटे हुए फल या पहले से कटे हुए तरबूज आदि खरीदने से बचें.विशेषज्ञों का कहना है कि 10 रुपये बचाने के चक्कर में आप अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, इसलिए सतर्क रहें.। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा मात्रा में इसे पीने से कैंसर जैसी घातक बीमारी हो सकती है।
आजकल हम रोजाना हजारों तरह के केमिकल के प्रभाव में रहते हैं. एक नई रिसर्च में पाया गया है कि कुछ सॉफ्ट ड्रिंक और फ्रूट जूस में टॉक्सिन की मात्रा जरूरत से ज्यादा होती है जिसका हेल्थ पर बुरा असर पड़ सकता है. इस ड्रिंक में जहरीले अर्सेनिक, बोरोन, सेलेनियम, स्ट्रोनियम, कैडमियम, मैग्नीज और निकले की मात्रा कहीं ज्यादा पाई गई. Image: Canva Toxin metals in Soft Drink and Juice: रोजाना के जीवन हममें से अधिकांश लोग बाजार से सॉफ्ट ड्रिंक और कभी-कभी पैकेटबंद फ्रूट जूस मंगाते ही हैं लेकिन इन पैकेटबंद फ्रूट जूस और सॉफ्ट ड्रिंक में जरूरत से ज्यादा टॉक्सिक मैटेरियल हो सकता है. शोधकर्ताओं ने दुनिया के अमीर देशों में मिलने वाले कम से कम पांच तरह के सॉफ्ट ड्रिंक और फ्रूट जूस में जरूरत से अधिक टॉक्सिक मैटिरयल को पाया है जो हेल्थ को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. तुलाने यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि 5 तरह के डिंक्स में टॉक्सिक मेटल देश के कानून के मानक से बहुत ज्यादा है।
अपने अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने अमेरिका में 60 से ज्यादा अमेरिकन सॉफ्ट ड्रिंक और मिक्स्ड फ्रूट जूस में मिले कंटेंट का विश्लेषण किया. इनमें मिले 25 अलग-अलग तरह के टॉक्सिक मेटल और अन्य हानिकारक तत्वों का पता लगाया तो पाया कि ये टॉक्सिक मेटल तय मानक से कहीं ज्यादा हैं।
शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि दो तरह के मिक्स फ्रूट जूस में अर्सेनिक का लेवल 10 माइक्रोग्राम प्रति लिटर से कहीं ज्यादा है. अध्ययन में यह भी पाया गया कि जितने तरह के लोकप्रिय सॉफ्ट ड्रिंक हैं उन सबमें लेड का लेवल कुछ न कुछ मात्रा में जरूर ज्यादा है. इसके साथ ही शोधकर्ताओं ने गाजर मिक्स और फ्रूट जूस, क्रेनबरी जूस और ओट मिल्क में कैडमियम का स्तर भी बहुत ज्यादा पाया. हैरानी की बात यह है कि जिस प्लांट बेस्ड मिल्क बेहद औषधिवर्धक माना जाता है, उसमें भी टॉक्सिक मेटल की अधिकता थी जबकि कुछ फ्रूट जूस में भी ज्यादा टॉक्सिक मेटल मिले।
शोधकर्ताओं ने जब इस ड्रिंक में मिले तत्वों का विश्लेषण किया तो इनमें जहरीले अर्सेनिक, बोरोन, सेलेनियम, स्ट्रोनियम, कैडमियम, मैग्नीज और निकले की मात्रा कहीं ज्यादा पाई गई. ये सभी रसायन बेहद हानिकारक होते हैं और किडनी, हार्ट, लिवर, आंखें सहित कई अंगों पर सीधा हमला करते हैं. इतना ही नहीं इन जहरीले रसायन से पेट में पल रहे बच्चों को नुकसान पहुंचा सकता है. शोधकर्ता टीवोडरोस ने बताया कि यह हैरानी की बात है कि अमेरिका में सॉफ्ट ड्रिंक में मिले टॉक्सिक की जांच के लिए कोई अध्ययन नहीं होता. यह इस तरह का पहला अध्ययन है, इसलिए इसपर और अधिक रिसर्च करने की जरूरत है. इस अध्ययन के बाद लोगों में जागरूकता आएगी. उन्होंने कहा कि इस अध्ययन के बाद लोगों को अपने बच्चे को ज्यादा सॉफ्ट ड्रिंक और प्लांट बेस्ड दूध नहीं देना चाहिए. उन्होंने कहा कि अर्सेनिक, लेड और कैडमियम बच्चों के विकास को बाधा पहुंचाते हैं और खासकर बौद्धिक विकास को रोक देते हैं.
एक अध्ययन में सॉफ्ट ड्रिंक और फ्रूट जूस में आर्सेनिक (Arsenic), लेड (Lead), कैडमियम (Cadmium) और मर्करी जैसे टॉक्सिक तत्व पाए गए हैं। ये किडनी, लिवर और दिमाग को नुकसान पहुंचा सकते हैं।कीटनाशक (Pesticides): भारत में हुए शोध (CSE रिपोर्ट) में कोका-कोला और पेप्सी जैसे कोल्ड ड्रिंक्स में खतरनाक कीटनाशकों के अंश मिले हैं, जो कैंसर और इम्यून सिस्टम को खराब कर सकते हैं।फास्फोरिक एसिड (Phosphoric Acid): यह हड्डियों से कैल्शियम को कम करता है, जिससे वे कमजोर (Osteoporosis) हो जाती हैं और दांतों के इनेमल को भी नुकसान पहुंचाता है।ब्रोमिनेटेड वेजिटेबल ऑयल (BVO): यह शरीर में कैंसर का खतरा पैदा कर सकता है।सोडियम बेंजोएट (Sodium Benzoate): यह प्रिजरवेटिव के रूप में इस्तेमाल होता है और लिवर व किडनी के लिए हानिकारक हो सकता है।कृत्रिम रंग और फ्लेवर (Artificial Colors/Flavors): कार्बोजाइन (Carbozine) जैसे रसायन पीले/नारंगी रंग के लिए मिलाए जाते हैं।एस्पार्टेम (Aspartame): शुगर-फ्री ड्रिंक्स में इस्तेमाल होने वाला यह आर्टिफिशियल स्वीटनर कैंसर के खतरे से जुड़ा है।यह वीडियो कोल्ड ड्रिंक्स में मौजूद हानिकारक रसायनों के बारे में बताता है:1mRajiv Dixit Ji OfficialYouTube• 19 फ़र॰ 2023जूस और शेक में मिलावट (Patna Chemical Incident):दुकानों पर बिकने वाले जूस और शेक को गाढ़ा करने के लिए ‘डी पाउडर’ नामक केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है।शरीर पर असर:हड्डियां कमजोर होना।कैंसर का खतरा।किडनी और लिवर डैमेज।मोटापा और डायबिटीज।यह वीडियो जूस में मिलाए जाने वाले हानिकारक पाउडर के बारे में बताता है:04:49News NationYouTube• 27 दिस॰ 2025सावधानी: पैकेटबंद जूस और कोल्ड ड्रिंक का सेवन सीमित करें। एक्सपायरी डेट हमेशा चेक करें और बहुत ज्यादा रंगीन ड्रिंक्स से बचें।Cold Drink कलर और जहर का कनेक्शन! |
गाजियाबाद में एक जूस विक्रेता को जूस में पेशाब मिलाकर बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।भोपाल में केमिकल युक्त आम का जूस: भोपाल में आम के जूस में सैकरिन और हानिकारक केमिकल मिलाकर बेचा जा रहा है। यह केमिकल युक्त जूस कैंसर, हार्ट, किडनी और पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है।लखनऊ में जहरीले केमिकल से बना जूस: लखनऊ में भी जहरीले केमिकल से जूस बनाए जाने की सूचना है, जहाँ पुलिस ने छापेमारी में बड़ी मात्रा में केमिकल बरामद किए हैं।अन्य जगहों पर भी शिकायतें: इसके अलावा, अलग-अलग शहरों में नकली और हानिकारक रसायनों वाले ड्रिंक्स बिकने की खबरें आ रही हैं।जहरीले जूस के नुकसान:स्वास्थ्य को खतरा: ये जूस लीवर, किडनी और पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।कैंसर का खतरा: केमिकल युक्त जूस के सेवन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां होने की आशंका है।फूड पॉइजनिंग: मिलावटी जूस पीने से फूड पॉइजनिंग के मामले भी सामने आते हैं।सावधानियां:सड़क किनारे बिकने वाले जूस और ड्रिंक्स से बचें।केवल भरोसेमंद और साफ़-सुथरी जगहों से ही जूस पिएं।अगर जूस का रंग बहुत ज्यादा गहरा या अजीब लगे, तो उसे न पिएं।अस्वीकरण: ये मामले मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं और स्वास्थ्य विभाग को इनकी जांच करनी चाहिए।आप इन सुझावों का पालन करके अपनी सेहत की रक्षा कर सकते हैं।
summer food safety issue: Food Safety and Standards Authority of India के नियमों की अनदेखी कर बिना लाइसेंस बॉटलिंग यूनिट्स चल रही हैं, जिससे लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। गर्मी बढ़ते ही शहर में ठंडे पेय पदार्थों की मांग तेज हो गई है, लेकिन इसके साथ ही लोगों की सेहत से खिलवाड़ भी बढ़ गया है। बाजार में धड़ल्ले से बिक रहे कई शीतल पेय, आइसक्रीम और रंग-बिरंगे ड्रिंक्स में केमिकल का इस्तेमाल हो रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। वहीं गन्ना रस और अन्य पेय बेचने वाले कई स्ट्रीट वेंडर साफ-सफाई के मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं।
दूसरी ओर, शहर के आउटर इलाकों में बिना पंजीयन के पानी की बॉटलिंग यूनिट्स संचालित हो रही हैं। यहां साधारण पानी को ‘मिनरल वाटर’ बताकर बोतलों में भरकर सीधे होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में सप्लाई किया जा रहा है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के नियमों की अनदेखी करते हुए बिना लाइसेंस यह कारोबार तेजी से फैल रहा है। न पानी की गुणवत्ता की जांच हो रही है और न ही पैकेजिंग मानकों का पालन, जिससे लोग अनजाने में असुरक्षित पानी पीने को मजबूर हैं।
खाद्य विभाग की टीम नियमित रूप से जांच कर रही है। सैंपल लेने का काम भी किया जा रहा है। सैंपल में गड़बड़ी मिलने पर निश्चित रूप से न्यायालय के माध्यम से कड़ी कार्रवाई होगी। इसमें जुर्माने से लेकर कारावास तक का प्रावधान होता है- तरुण बिरला, खाद्य विभाग 44 डिग्री पर है पारा। जिले का अधिकतक तापमान इन दिनों 44 डिग्री पर है। मौसम विभाग की माने तो दो दिनों तक तापमान ऐसे ही बना रहेगा। 20 अप्रैल के बाद तापमान में हल्की नर्मी आने की संभावना है। भीषण गर्मी के चलते जन-जीवन प्रभावित है। स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ रहा है।
डॉ. महेंद्र प्रसाद ने बताया कि केमिकलयुक्त पेय पदार्थों के सेवन से पेट संबंधी रोग, फूड पॉइजनिंग, लीवर व किडनी पर असर, एलर्जी और इम्यून सिस्टम कमजोर होने का खतरा रहता है। वहीं दूषित या नकली मिनरल वाटर से टायफाइड, डायरिया और अन्य जलजनित बीमारियां फैल सकती हैं। उन्होंने लोगों को सतर्क रहकर केवल प्रमाणित और स्वच्छ पेय पदार्थों का ही सेवन करने की सलाह दी है।
खाद्य विभाग की सक्रियता कमजोर होने का फायदा ऐसे धंधे में लिप्त कारोबारी बखूबी उठा रहे हैं। जांच के दौरान पिछली बार तुमड़ीबोड़ में पानी पाऊच फैक्ट्री में गड़बड़ी सामने आई थी। साल्हेवारा क्षेत्र में इस तरह की गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद फैक्ट्री को सील किया गया था। वहीं जार में बेचे जाने वाले पानी की जांच को लेकर विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वह पैक्ड की श्रेणी में नहीं आता, तो उसकी गुणवत्ता की जांच वे नहीं करेंगे।
एलोवेरा को आमतौर पर हेल्दी माना जाता है लेकिन ये सब के लिए सही है ये गलती भारी पड़ सकती है. यह सबको फायदा नहीं पहुंचाता है, बल्कि कई लोगों पर उल्टा असर कर सकता है. एलोवेरा इन लोगों के लिए जहर भी साबित हो सकता है. रायपुर में इन दिनों एलोवेरा का इस्तेमाल आयुर्वेदिक औषधि और ब्यूटी प्रोडक्ट के तौर पर किया जाता हैं. खासकर स्किन, बाल और पेट के लिए एलोवेरा को चमत्कारी माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये हरे-हरे पौधे का जूस कुछ लोगों के लिए ज़हर बन सकता है? जी हां, एलोवेरा हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होता. अगर आप भी बिना सोचे-समझे इसका सेवन कर रहे हैं, तो ये सेहत को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. गौरतलब है कि एलोवेरा अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है. इसका इस्तेमाल ना सिर्फ स्किन और बालों के लिए बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है. वजन घटाने से लेकर पाचन और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में भी एलोवेरा जूस बेहद कारगर मना जाता है. जो लोग हर रोज एलोवेरा जूस का सेवन करते हैं उनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है. हालांकि हर वस्तु का बिना सोचे समझे इस्तेमाल घातक हो सकता है.
आयुर्वेद की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ज्योति धाकड़ का कहना है कि एलोवेरा का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. इसके ज्यादा इस्तेमाल से दस्त, पेट दर्द, पोटैशियम की कमी और किडनी संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं. डॉक्टर ने चेताया कि गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के साथ-साथ छोटे बच्चों को एलोवेरा से परहेज करना चाहिए. वहीं, मासिकधर्म के दौरान महिलाओं को भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
ज्योति धाकड़ का कहना है कि एलोवेरा भले ही कई औषधीय गुणों से भरपूर हो, लेकिन हर व्यक्ति के लिए इसका सेवन लाभकारी नहीं होता. उन्होंने बताया कि एलोवेरा जूस का सेवन गर्भवती महिलाओं को बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसमें मौजूद कुछ तत्व गर्भ में पल रहे शिशु और मां दोनों के लिए हानिकारक हो सकते हैं. स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी एलोवेरा से कोसों दूर रहना चाहिए, क्योंकि इसके सेवन से दूध के माध्यम से इसके अंश बच्चों तक पहुंच सकते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं. छोटे बच्चों को भी एलोवेरा का सेवन नहीं कराना चाहिए. मासिकधर्म के दौरान भी महिलाओं को एलोवेरा से परहेज करना चाहिए. आयुर्वेद में हर जड़ी-बूटी या औषधि का सही सेवन और मात्रा बेहद अहम होती है. इसलिए एलोवेरा के सेवन से पहले किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेना अनिवार्य है।
डॉ. ज्योति धाकड़ ने बताया कि किडनी की समस्या से जूझ रहे मरीजों को एलोवेरा जूस का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि एलोवेरा में पाए जाने वाले लैक्सेटिव (रेचक) गुण शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और डिहाइड्रेशन का कारण बन सकते हैं। इससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और एलो लेटेक्स की अधिक मात्रा गुर्दे की क्षति (किडनी डैमेज) तक कर सकती है।डॉ. धाकड़ ने कहा कि एलोवेरा कुछ दवाओं के साथ प्रतिक्रिया (रिएक्शन) भी कर सकता है और शरीर में पोटैशियम का स्तर घटा सकता है, जिससे किडनी की समस्याएं और बढ़ सकती हैं। उन्होंने सलाह दी कि जिन लोगों को किडनी से जुड़ी परेशानी है, उन्हें एलोवेरा जूस से परहेज करना चाहिए।
