CG : बेमेतरा में नील-हरित शैवाल उत्पादन को बढ़ावा, टिकाऊ कृषि की दिशा में बड़ा कदम …
बेमेतरा । जिले में कृषि क्षेत्र को अधिक उन्नत, किफायती और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में नील-हरित शैवाल (ब्लू ग्रीन Algae) का उत्पादन प्रारंभ किया गया है। जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग के संयुक्त प्रयासों से शासकीय प्रक्षेत्र मोहगांव में इस जैविक तकनीक को सफलतापूर्वक विकसित किया गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन उपलब्ध कराना तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम करना है। नील-हरित शैवाल, जिसे जैव उर्वरक (Biofertilizer) के रूप में जाना जाता है, धान सहित विभिन्न फसलों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है।
मदर कल्चर के माध्यम से जिलेभर में विस्तार की योजना
कृषि विभाग द्वारा मोहगांव प्रक्षेत्र में तैयार किए गए नील-हरित शैवाल के मदर कल्चर का उपयोग करते हुए इसे जिले के अन्य गांवों एवं कृषकों के खेतों तक विस्तार देने की कार्ययोजना तैयार की गई है। इसी क्रम में ग्राम मौहाभाठा के प्रगतिशील कृषक टोकेश्वर साहू के खेत में भी नील-हरित शैवाल का उत्पादन सफलतापूर्वक प्रारंभ किया गया है। विभाग का लक्ष्य है कि इस नवाचार को जिले के अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाया जाए, जिससे वे अपने खेतों में इसका उपयोग कर सकें और उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ लागत में कमी ला सकें।
मृदा स्वास्थ्य सुधार एवं लागत में कमी का प्रभावी माध्यम
नील-हरित शैवाल का उपयोग मृदा की उर्वरता बढ़ाने में अत्यंत सहायक होता है। यह वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर कर मिट्टी में उपलब्ध कराता है, जिससे फसलों को प्राकृतिक रूप से पोषण मिलता है। इसके उपयोग से रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम हो जाती है, जिससे किसानों की लागत घटती है और पर्यावरण पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव भी कम होता है। साथ ही यह मृदा की संरचना एवं जैविक गतिविधियों को सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे दीर्घकालीन कृषि उत्पादकता में वृद्धि होती है।
कृषि विभाग द्वारा प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन
कृषि विभाग द्वारा किसानों को नील-हरित शैवाल उत्पादन एवं उसके प्रभावी उपयोग के संबंध में निरंतर प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। विशेषज्ञों द्वारा खेत स्तर पर प्रदर्शन (Field Demonstration), कार्यशालाएं एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि किसान इस तकनीक को आसानी से समझकर अपनाएं। इसके साथ ही किसानों को आवश्यक संसाधन एवं सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
टिकाऊ कृषि और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
यह पहल न केवल किसानों की आय में वृद्धि करने में सहायक होगी, बल्कि टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture) को भी बढ़ावा देगी। रासायनिक उर्वरकों के कम उपयोग से मिट्टी, जल एवं पर्यावरण का संरक्षण संभव होगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ कृषि प्रणाली सुनिश्चित की जा सकेगी। यह प्रयास राज्य एवं केंद्र सरकार की जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की नीति के अनुरूप भी है।
किसानों से अपील: नवाचार अपनाकर बढ़ाएं उत्पादन
उप संचालक कृषि मोरध्वज डडसेना ने जिले के समस्त कृषकों से अपील की है कि वे नील-हरित शैवाल जैसी उन्नत एवं लाभकारी तकनीक को अपनाएं। उन्होंने कहा कि यह तकनीक न केवल उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में सहायक है, बल्कि खेती को अधिक लाभकारी एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किसानों को चाहिए कि वे इस नवाचार का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और आधुनिक, टिकाऊ कृषि की दिशा में आगे बढ़ें। बेमेतरा जिले में नील-हरित शैवाल उत्पादन की यह पहल आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में एक मॉडल के रूप में स्थापित हो सकती है, जिससे अन्य जिलों के किसान भी प्रेरणा लेकर इसे अपनाएंगे।
