अंबागढ़ चौकी , एक तरफ ड्यूटी की जिम्मेदारी और दूसरी तरफ बच्चों की परवरिश इन दोनों ही भूमिकाओं को एएनएम मानकुंवर जामगड़े न केवल बखूबी निभा रही हैं, बल्कि समाज के लिए एक मिसाल भी पेश कर रही हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र थुआडबरी में पदस्थ एएनएम मानकुंवर आज मोहला-मानपुर क्षेत्र के ग्रामीणों के बीच भरोसे का दूसरा नाम बन चुकी है। ग्रामीण अंचलों में आज भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी एक बड़ी चुनौती है।
ऐसे में सीमित संसाधनों के बीच मानकुंवर ने अब तक 500 से अधिक सफल डिलीवरी कराकर कई माताओं और नवजातों को सुरक्षित जीवन दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि डिलीवरी का केस कितना भी जटिल क्यों न हो, वे निजी अस्पताल जाने के बजाय सीधे थुआडबरी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना बेहतर समझते हैं। उन्हें विश्वास है कि जामगड़े सिस्टर के हाथों में जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित रहेंगे। कोरोना महामारी का वह दौर जब लोग संक्रमण के डर से अपनों से भी दूरी बना रहे थे, उस कठिन समय में मानकुंवर ने अपनी जान की परवाह नहीं की। कोविड काल के दौरान ही करीब 100 से ज्यादा डिलीवरी कराई। खुद के संक्रमित होने के खतरे को पीछे छोड़ उन्होंने गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
ग्रामीणों का यह अटूट विश्वास ही मुझे प्रेरणा देता है: अपनी सेवाओं के बारे में मानकुंवर जामगड़े कहती हैं मुझे इस क्षेत्र में काफी समय हो चुका है। अब तक 500 से ज्यादा और कोरोना काल में 100 से अधिक सफल प्रसव कराए हैं। ग्रामीणों का यह अटूट विश्वास ही मुझे अपनी जिम्मेदारी और मुस्तैदी से निभाने की प्रेरणा देता है। जामगड़े जैसी महिलाएं यह साबित करती है कि सेवा और समर्पण का कोई विकल्प नहीं होता। ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में उनका यह योगदान आज क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।
मेरा सफल प्रसव हुआ और हम दोनों स्वस्थ रहे ग्रामीण मंजू साहू ने कहा कि कोरोना के समय जब मेरी डिलीवरी का वक्त आया, तो मैं बहुत डरी हुई थी कि अस्पताल जाना सुरक्षित होगा या नहीं। तब सिस्टर ने मुझे ढांढस बंधाया और कहा डरने की कोई बात नहीं उनकी वजह से मेरा सफल प्रसव हुआ और हम दोनों स्वस्थ रहे। ग्रामीण ललिता मेश्राम बताया कि मैं चार बच्चों की मां हूं्, मेरी और मेरी बहू की डिलीवरी भी जामगड़े सिस्टर ने ही कराई है। हमारे आसपास के गांवों की महिलाएं सिर्फ इन्हीं के भरोसे यहां आती है।
