राजनांदगांव , ऑनलाइन फार्मेसी के विरोध सहित अन्य मांगों पर जिलेभर की दवा दुकानें बंद रही। मरीजों को ब्रांडेड दवा नहीं मिली तो सरकारी अस्पतालों से जेनेरिक दवा लेनी पड़ी। लेकिन उन्हें ब्रांडेड दवाओं का दूसरा वाजिब विकल्प नहीं मिला। मरीजों को पहले से जारी इलाज की जानकारी देकर डॉक्टरों की सलाह और पर्ची लेनी पड़ी।
तब कहीं उन्हें सरकारी अस्पताल की पर्ची से जेनेरिक दवा मिली। बीपी, शुगर वाले मरीज जिन्हें रोज दवा लेनी पड़ती है उनके परिजनों को भटकना पड़ गया। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आव्हान पर जिले के केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट संघ ने दवा दुकानें बंद रही। शहर में रैली निकाल कर ऑनलाइन फार्मेसी के विरोध में नारेबाजी की और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
दवा विक्रेताओं ने ऑनलाइन बिक्री पर कड़े नियम लागू करने, फर्जी ई-फार्मेसी साइट्स को बंद करने, डॉक्टर की वैध पर्ची बिना नशीली, प्रतिबंधित दवा की ऑनलाइन सप्लाई रोकने की मांग की है। ऑनलाइन दवा की गुणवत्ता, भंडारण मे संदेह रहता है। नकली, एक्सपायरी दवा से दुष्प्रभाव की शिकायतें रहती है। बिना उचित जांच दवा बिक्री से नशे के अवैध कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है।
जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में दवा लेने पहुंचे परिजन जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. महेन्द्र प्रसाद ने बताया भर्ती मरीजों का इलाज और दवा चल रही है। दवा काउंटर में अगले 6 माह की दवाओं का स्टॉक है। जन औषधि केन्द्र 24 घंटे खुला रहा। सरकारी डॉक्टरों द्वारा जेनेरिक दवा लिखी जाती है। कोई समस्या या इमरजेंसी के हालत नहीं थे। मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. अतुल देशकर ने बताया दवा पर्याप्त है। एहतियात के तौर पर काउंटरों और फार्मासिस्टों की संख्या बढ़ा कर ड्यूटी लगाई थी। दवा नहीं मिलने या इमरजेंसी जैसी कोई शिकायत नहीं पहुंची।
