राजनांदगांव हरियाली बहिनी अभियान से समूह की महिलाएं मिलेट से मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ और पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचा रही है। अब तक 20 हजार से ज्यादा लोगों को मिलेट व्यंजन परोस कर बेहतर स्वास्थ्य और पर्यावरण सरंक्षण का संदेश दिया गया। कोदो-कुटकी, रागी ने महिलाओं के जीवन में बदलाव भी लाया।
इस अभियान का उद्देश्य मिलेट के उत्पादन और इसके उपयोग को बढावा देना, महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना, कुपोषण दूर करना जल व पर्यावरण संरक्षण करना है। नवंबर 2025 में छोटे स्तर से शुरू हुई पहल केवल मिलेट उत्पादों तक सीमित नहीं है। अब तक 20 हजार से अधिक लोगों तक पहुंच चुकी है। कोदो, कुटकी, रागी जैसे पारंपरिक अनाज को थाली तक पहुंचाने के साथ यह अभियान स्वास्थ्य जागरूकता, महिला सशक्तिकरण, जल संरक्षण, कुपोषण मुक्ति का आंदोलन बन गया। महिला समूह की रैली, यात्रा, ट्रेनिंग बैठक में 20 हजार से ज्यादा लोगों को मिलेट व्यंजन परोसा।
देश के कई राज्यों में जागरूक किया गया अभियान प्रमुख शिव कुमार देवांगन ने बताया मिलेट जागरूकता यात्रा में प्रदेश के 72 विधायकों, सांसदों तक मिलेट का संदेश पहुंचा, इसका उपयोग करने प्रेरित किया गया। गुजरात, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश, झारखंड और ओडिशा के लोगों से संपर्क कर अभियान से जोड़ा गया। जांजगीर- चांपा, बलौदाबाजार, धमतरी, केसीजी और एमएमसी जिलों में मिलेट जागरूकता का विस्तार हुआ। कृषि विभाग मिलेट उत्पाद केंद्र स्थापित करने की तैयारी में है।
मिलेट कुपोषण से लड़ने में काफी प्रभावी व्यंजन मिलेट कम पानी में तैयार होने वाली फसल है जो कुपोषण से लड़ने में प्रभावी है। डायबिटीज और मोटापे के नियंत्रण में सहायक है। फाइबर, कैल्शियम और पोषक तत्वों से भरपूर है। जलवायु परिवर्तन के दौर में टिकाऊ कृषि का बेहतर विकल्प भी है। महिलाओं को उत्पादन से जोड़ना, पारंपरिक कोदो-कुटकी प्रसंस्करण तकनीकों का संरक्षण, बेहतर मूल्य दिलाने बाजार विस्तार करने की योजना है।
