राजनांदगांव | राज्य सरकार द्वारा 16 जून से सभी सरकारी स्कूलों में प्रार्थना के दौरान गायत्री मंत्र सहित मंत्रों के उच्चारण को अनिवार्य किया है। इस निर्णय पर ईसाई समाज ने आपत्ति दर्ज कराई है। समाज ने धार्मिक स्वतंत्रता व संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा विषय बताते हुए अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों के लिए इस व्यवस्था को बाध्यकारी नहीं बनाए जाने की मांग की है।
ईसाई समाज के अध्यक्ष क्रिस्टोफर पॉल ने इस संबंध में राज्य शासन के सचिव को पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जीवन जीने और उपासना करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। ऐसे में किसी विशेष धार्मिक परंपरा से जुड़े मंत्र के अनिवार्य उच्चारण से अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
