राजनांदगांव , विश्व रक्तदान दिवस पर छत्तीसगढ़ साहित्य सृजन समिति के तत्वावधान में पेंड्री के एक स्कूल में साहित्यिक परिचर्चा एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, सामाजिक सरोकार, रक्तदान, तकनीक के प्रभाव और सड़क सुरक्षा जैसे समकालीन विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम में शामिल वक्ताओं ने कहा कि साहित्य केवल शब्दों का संसार नहीं है, बल्कि समाज को दिशा देने और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि स्कूल की प्राचार्या डॉ. भारती गौते ने मां सरस्वती के पूजन-अर्चन के साथ आयोजन का शुभारंभ किया। उन्होंने कवियों एवं साहित्यकारों का तिलक लगाकर और कलम भेंट कर सम्मान किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि साहित्य व्यक्ति को संस्कारित, संवेदनशील और प्रेरित बनाता है। रामायण, महाभारत और गीता जैसे ग्रंथ आज भी समाज को जीवन मूल्यों की सीख दे रहे हैं।
पुराने समय से लोग इन ग्रंथों से सीख ले रहें है। वर्तमान पीढ़ी को इन ग्रंथों से सीखने की जरूरत है। डोंगरगांव से पहुंची कवयित्री रोहिणी पटेल ने रक्तदान विषयक कविता प्रस्तुत कर विशेष सराहना प्राप्त की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग की ओर से बैग किट भेंटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में करिश्मा श्रीवास्तव, शैलेष गुप्ता, इकबाल खान, डोमन डोंगरे, रोशन साहू, आनंद राम, फकीर साहू सहित रचनाकारों ने काव्य पाठ किया।
तकनीक का साधन पर ज्यादा उपयोग जानलेवा कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे दिग्विजय कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. शंकर मुनि राय ने मोबाइल संस्कृति पर चिंता जताते हुए कहा कि तकनीक सुविधा का साधन है, लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग लोगों को एक-दूसरे से दूर करता जा रहा है। वहीं वरिष्ठ साहित्यकार आत्माराम कोशा ने कहा मोबाइल, बाइक और आधुनिक जीवनशैली ने जीवन की गति को तो बढ़ा दी है। इसके दुष्परिणाम सड़क हादसों के रूप में सामने आ रहे हैं। वहीं कई लोग अपाहिज होकर जीवन यापन करने मजबूर होते हैं।
ग्रंथों में समाज को निखारने की अपार शक्ति शामिल मुख्य अतिथि डॉ. भारती गौते ने कहा कि साहित्य व्यक्ति के विचारों को परिष्कृत करता है और उसे बेहतर नागरिक बनने प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए साहित्यिक गतिविधियों का निरंतर आयोजन आवश्यक है। अन्य वक्ताओं ने कहा डिजिटल युग में मोबाइल शिक्षा, सूचना और संवाद का अहम है। हालांकि इसके अति प्रयोग से सामाजिक दूरी, समय की बर्बादी और मानसिक प्रभाव जैसी चुनौतियां हैं। विशेषज्ञों ने तकनीक के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया।
