राजनांदगांव , स्मार्ट मीटर की स्मार्टनेस यह है कि बिजली गुल होने के बाद इसके भीतर लगी छोटी बैटरी से लाइटें जलती रहती है। इससे स्मार्ट मीटर का नेटवर्क और सर्वर से कनेक्ट रहने वाला सिस्टम एक्टिव रहता है। डेटा सर्वर में ट्रांसफर होता रहता है।
शहर और घरों की बिजली गुल होने पर बैटरी अपने आप एक्टिव हो जाती है और इसकी लाइटें ब्लिंक करने लगती है। सप्लाई जारी रहने पर स्मार्ट मीटर के भीतर लगी बैटरी चार्ज होती रहती है। गुल होने पर मीटर की लाइटें इसी बैटरी से जलती है। अधिकांश को इसकी जानकारी नहीं होने से रोज दर्जनभर बिजली उपभोक्ता कंपनी के कार्यालय में शिकायत करने पहुंच रहें है। अफसरों को स्मार्ट मीटर पर फैला भ्रम दूर करना पड़ रहा।
चार जिलों में 4.33 लाख स्मार्ट मीटर लगाया गया है। बिजली कंपनी के अफसर गर्मी में ज्यादा खपत को ज्यादा बिल आने का कारण बता रहें है। स्मार्ट मीटर पर फैले भ्रम और अफवाहों से बचने कहा जा रहा है। कंपनी से मिली जानकारी के अनुसार स्मार्ट मीटर में दिखाई देने वाली नेट स्टेटस और आरएफ स्टेटस लाइटें संचार व्यवस्था का हिस्सा हैं।
सूचनाओं का आदान-प्रदान जारी रखने बैटरी बैकअप: बिजली कंपनी के अफसरों ने बताया स्मार्ट मीटर और केंद्रीय सर्वर के बीच रीडिंग तथा तकनीकी सूचनाओं का आदान-प्रदान जारी रखने बैटरी बैकअप है। संचार संबंधी एलईडी संकेतक सक्रिय हैं, लेकिन इससे अतिरिक्त यूनिट जुड़ने और नहीं बिल में कोई बढ़ोतरी होती है। वास्तविक बिजली खपत का रिकॉर्ड केवल पल्स एलईडी और मीटर की यूनिट रीडिंग पर दर्ज होता रहता है। बताया गया कि घर में जितना अधिक विद्युत भार उपयोग होगा, यह संकेतक उतनी तेजी से ब्लिंक करेगा। उपभोक्ताओं का बिल इसी रीडिंग के आधार पर तैयार किया जाता है।
शंका होने पर अफसरों से संपर्क करने की अपील इस संबंध में कार्यपालक निदेशक शिरीष सेलट ने कहा कि स्मार्ट मीटर पारदर्शी बिलिंग और बेहतर उपभोक्ता सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उपभोक्ता सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैल रही भ्रामक जानकारी पर भरोसा नहीं करें और शंका की स्थिति में बिजली कंपनी के अफसरों से संपर्क करें। स्मार्ट मीटर में बैटरी बैकअप है, बिजली बंद होने पर संचार प्रणाली सक्रिय रहती है, एलईडी केवल नेटवर्क कनेक्टिविटी दर्शाती हैं, बिल से संबंध नहीं है। दर वृद्धि का असर 0 से 3.65 प्रतिशत सीमित है।
