CG : संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय की प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल, जांच की मांग तेज …
रायपुर। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, अंबिकापुर में बीते मई महीने में संपन्न हुई प्राध्यापक भर्ती प्रक्रिया गंभीर आरोपों और विवादों के कारण एक बार फिर चर्चा में आ गई है। विश्वविद्यालय द्वारा 22 दिसंबर 2025 को सहायक प्राध्यापक, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के विभिन्न पदों के लिए जारी विज्ञापन के बाद कई अभ्यर्थियों, सामाजिक संगठनों और छात्र-युवा संगठनों ने भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं, नियमों के उल्लंघन और प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी के आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू करने से पहले आवश्यक रोस्टर निर्धारण समिति का गठन नहीं किया गया तथा विश्वविद्यालय में रोस्टर रजिस्टर का समुचित संधारण भी नहीं किया गया। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के माध्यम से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह दावा किया गया है कि कार्यपरिषद की पूर्व स्वीकृति के बिना ही भर्ती विज्ञापन जारी किया गया, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े नियमों के अनुसार ऐसी स्वीकृति आवश्यक मानी जाती है।
भर्ती प्रक्रिया में शामिल कुछ विभागों और विषयों को लेकर भी अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई है। आरोप है कि कुछ विषयों में पात्र अभ्यर्थियों को अयोग्य घोषित किया गया, जबकि पात्रता और अनुभव संबंधी मानकों की व्याख्या में असमानता बरती गई। पर्यावरण विज्ञान, बायोटेक्नोलॉजी, फार्मेसी, वानिकी तथा अन्य विभागों के कई अभ्यर्थियों ने अपने आवेदन निरस्त किए जाने पर सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ताओं का यह भी कहना है कि कुछ विभागों के नाम और विषय संयोजन पूर्व की भर्तियों से भिन्न रखे गए, जिससे अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई। इसके अलावा विज्ञापन में संबद्ध विषयों (एलाइड सब्जेक्ट्स) का स्पष्ट उल्लेख नहीं होने के कारण कई उम्मीदवारों को आवेदन और पात्रता निर्धारण में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। युवा कांग्रेस और अन्य संगठनों ने भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। इस संबंध में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर भर्ती प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और निर्णय लेने वाली संस्थाओं की भूमिका की भी जांच कराने का अनुरोध किया गया है।
वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के अनुरूप संचालित की गई है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार सभी पदों के लिए निर्धारित नियमों और आरक्षण प्रावधानों का पालन किया गया तथा यदि किसी स्तर पर कोई आपत्ति या शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी जांच कराना प्रशासन के लिए खुला विकल्प है। कुलपति प्रो. राजेन्द्र लकपाले ने मीडिया से चर्चा में कहा कि भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और यदि किसी आरटीआई उत्तर या प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर भ्रम या विसंगति सामने आई है तो उसकी समीक्षा की जाएगी। अब यह मामला विश्वविद्यालय प्रशासन, राज्य शासन और उच्च शिक्षा विभाग के लिए महत्वपूर्ण बन गया है। अभ्यर्थियों और संबंधित संगठनों की मांग है कि निष्पक्ष जांच के माध्यम से तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और उच्च शिक्षा संस्थानों की विश्वसनीयता बनी रहे।शैक्षिक संसाधन प्रमुख मांगें भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। भर्ती प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और समितियों की भूमिका की जांच की जाए। यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर नई प्रक्रिया प्रारंभ की जाए।
