राजनांदगांव : रेत माफियाओं ने बदला पैंतरा, अफसरों को राजनीतिक रसूख की आड़ में दे रहे चकमा …
डोंगरगांव l बारिश के पहले रेत चोरों ने नगर और ग्रामीण क्षेत्र में रेत को चिन्हांकित जगह से बड़ी मात्रा में डंप किया गया है। मानसून की दस्तक और नदियों में पानी बढ़ने के साथ ही क्षेत्र में सक्रिय रेत माफियाओं ने अब अपना दूसरा पैंतरा चलना शुरू कर दिया है। गर्मी के दिनों में बेखौफ होकर नदियों से रेत निकालने के बाद, अब इन रेत चोरों ने नगर सहित ग्रामीण इलाकों के चिन्हांकित स्थानों पर भारी मात्रा में रेत का अवैध स्टॉक (डंप) कर लिया है। अब इस डंप की गई रेत को बाजार में मनमाने और महंगे दामों पर बेचा जा रहा है।
चौकाने वाली बात यह है कि इस अवैध काले कारोबार में कई रसूखदार नाम शामिल हैं, जिनके तार राजनीतिक दलों से जुड़े होने के कारण स्थानीय प्रशासन इन पर हाथ डालने से कतराता रहा है। वर्तमान में नगर सहित पूरे डोंगरगांव क्षेत्र में कई ऐसे बड़े रेत यार्ड बन चुके हैं, जहां सैकड़ों ट्रिप रेत अवैध रूप से डंप कर रखी गई है। कार्रवाई से बचने के लिए रेत माफियाओं ने इस स्टॉक को तिरपाल और ग्रीन नेट (हरे पर्दे) से पूरी तरह कवर कर दिया है ताकि अधिकारियों की सीधी नजर इस पर न पड़ सके।
रेत के इस काले खेल के कई बड़े ठिकाने सामने आए हैं। पहला ठिकाना (कॉलेज रोड) नगर के कॉलेज रोड स्थित एक प्राइवेट यार्ड में भारी मात्रा में रेत डंप कर रखी गई है। यहां से रात के अंधेरे में धीरे-धीरे महंगे दामों पर रेत की सप्लाई की जा रही है। दूसरा ठिकाना (कोहका-मटिया मार्ग) कोहका-मटिया मार्ग के मुख्य चौराहे पर रेत के एक विशाल भंडार को चारों तरफ से ग्रीन पर्दे से घेरकर छिपाया गया है। यह रेत शिवनाथ नदी से अवैध रूप से निकाली गई है। तीसरा ठिकाना (निर्माणाधीन मकान) रेत माफियाओं ने अधिकारियों को भ्रमित करने का नया तरीका निकाला है।
रेत की जांच के लिए टीम रवाना की जा रही: बंजारे खनिज विभाग अधिकारी भारत लाल बंजारे ने कहा कि खनिज नियमों का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। कोहका-मटिया मार्ग और कॉलेज रोड सहित अन्य स्थानों पर डंप की गई रेत की जांच के लिए टीम रवाना की जा रही है। स्टॉक का सत्यापन कर विधिवत खनिज अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।
नदी के बीचो-बीच रैंप बना अब भी चल रहा उत्खनन स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि मानसून आने के बाद भी रेत चोरी का सिलसिला थमा नहीं है। कुछ स्थानों पर तो नदी के बीचो-बीच अस्थायी मिट्टी का रैंप (पुल) बनाकर अभी भी पानी के भीतर से रेत निकाली जा रही है। नदी किनारे स्थित सरकारी और प्राइवेट जमीनों को माफियाओं ने अपना पर्सनल गोडाउन बना लिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इसकी शिकायत कई बार स्थानीय स्तर पर की गई, लेकिन राजनीतिक संरक्षण के कारण कार्रवाई हमेशा ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है।
विशेष टीम जल्द ही करेगी बड़ी कार्रवाई: तहसीलदार इस पूरे मामले की सुगबुगाहट और डंप स्थलों की सटीक लोकेशन के साथ जब जिम्मेदार अधिकारियों से सीधी बात की, तो उन्होंने सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। डोंगरगांव तहसीलदार कमल किशोर साहू ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। डोंगरगांव और आसपास के क्षेत्रों में जहां भी अवैध रूप से रेत डंप की गई है, उसकी सूचना मिली है। शीघ्र ही राजस्व विभाग की एक विशेष टीम गठित कर इन सभी अवैध डंप स्थलों पर छापेमारी की जाएगी और रेत को जब्त करने की सख्त कार्रवाई होगी।
