डोंगरगांव , डोंगरगांव इस वर्ष जैन धर्म की आध्यात्मिक साधना का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। नगर में दिगंबर व श्वेतांबर दोनों जैन समाज की साध्वियों का चातुर्मास प्रस्तावित होने से आगामी चार माह तक धर्म, तप, त्याग, साधना और जिनवाणी की अमृतधारा प्रवाहित होगी। दोनों समाजों के द्वारा स्वागत व चातुर्मास की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है। श्वेतांबर जैन समाज की साध्वी वृंद राजस्थान के जैसलमेर से पद विहार करते हुए ग्राम अर्जुनी पहुंच चुकी हैं। 20 जुलाई को सुबह 9 बजे साध्वी संघ का भव्य मंगल प्रवेश डोंगरगांव में होगा। जगह-जगह स्वागत द्वार, पुष्पवर्षा व धार्मिक स्वागत की तैयारी की जा रही है।
खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्रीजिनमणिप्रभ सूरीश्वर जी मसा के आशीर्वाद तथा आगम ज्योति श्रीप्रमोद जी मसा, रतनमाला श्रीजी मसा की निश्रा में डॉ. विद्युत्प्रभा श्रीजी मसा की सुशिष्या साध्वी आज्ञांजना श्रीजी मसा, साध्वी आगमरूचि श्रीजी मसा आदि ठाणा-2 का चातुर्मास डोंगरगांव में होगा। श्रीजैन श्वेतांबर श्रीसंघ व चातुर्मास समिति के द्वारा समस्त व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है। दूसरी ओर, दिगंबर जैन समाज के लिए भी महत्वपूर्ण रहेगा। जैनाचार्य श्रीविद्यासागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका श्रीतपोमति माताजी का चातुर्मास भी डोंगरगांव में प्रस्तावित है। आर्यिका संघ अमरकंटक से विहार करते हुए रायपुर पहुंच चुका है और शीघ्र ही नगर में मंगल आगमन करेगा। दोनों जैन समाजों की साध्वियों के चातुर्मास से डोंगरगांव में प्रतिदिन प्रवचन, स्वाध्याय, तप-अनुष्ठान, संस्कार शिविर लगाए जाएंगे।
धर्माराधना व संयम का श्रेष्ठ अवसर है जैन धर्म में वर्षा ऋतु के चार माह को चातुर्मास कहा जाता है। इस अवधि में सूक्ष्म जीवों की रक्षा व अहिंसा के पालन के उद्देश्य से जैन साधु-साध्वियां एक ही स्थान पर विराजमान रहकर तप, स्वाध्याय, प्रवचन, जिनवाणी के प्रचार-प्रसार व आत्मकल्याण की साधना करते हैं। यह काल श्रद्धालुओं के लिए भी धर्माराधना, संयम और संस्कारों को आत्मसात करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।
