राजनांदगांव , इन दिनों जिला अस्पताल सहित जिले के सीएचसी, पीएचसी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। लेकिन सरकारी अस्पतालों में मौसमी बुखार, सर्दी-खांसी, जुकाम, एलर्जी, एंटी बायोटिक, पेन कीलर, ईएनटी, चर्म रोग से संबधित करीब 42 प्रकार की दवाओं की कमी है।
डॉक्टरों के सामने विकल्प नहीं और केवल जेनेरिक दवा लिखने का दबाव रहता है। ऑर्डर करने के बाद सीजी एमएससी से दवाओं की पर्याप्त सप्लाई नहीं हो रही। ऑर्डर के बाद पाइप लाइन में होने का हवाला दिया जा रहा है।
अस्पताल प्रबंधन के पास एक लिमिट तक ही दवाओं की लोकल खरीदी करने का अधिकार नहीं है। लोकल खरीदी करने सीजी एमएससी से एनओसी की जरूरत पड़ती है, लेकिन सीसी एमएससी ऑर्डर के बाद दवाएं सप्लाई की पाइप लाइन प्रक्रिया में होने का हवाला देकर एनओसी नहीं देती। ऐसे में जैसे-तैसे काम चला रहें है। जिलेभर के अस्पतालों में विगत करीब 6 माह से यह स्थिति बनी हुई है। बीमारियों के सीजन को देख कुछ माह पहले ऑर्डर करने पर मांग के अनुरूप पूरी और पर्याप्त दवाएं नहीं पहुंची है।
जिला अस्पताल की मेडिसिन और बच्चा ओपीडी में रोज बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। दवाओं का पर्याप्त स्टॉक नहीं होने से डॉक्टरों के सामने विकल्प नहीं रहता है। उन्हें केवल जेनेरिक दवा लिखने कहा गया और बाहर की दवाएं नहीं लिखनी है। डॉक्टरों को लक्षण के अनुरूप एक जैसे फॉर्मूले वाली जेनेरिक दवा लिखनी पड़ रही वह भी मरीजों को अस्पताल के दवा काउंटर में नहीं मिल पाती। ऐसे में मेडिकल स्टोर्स में अपनी तकलीफ, बीमारी बता कर डॉक्टर की पर्ची दिखा कर बाहरी दवा खरीदने मजबूर हो रहे हैं।
सीजी एमएससी से एनओसी मिलने के बाद भी अफसरों के पास दवाओं की दूसरे मद की राशि से एक तय लिमिट से ज्यादा लोकल पर्चेस का अधिकार नहीं है। ऐसा करने पर जवाबदेही रहेगी। डिमांड अनुरूप दवाओं की तय लिमिट से ज्यादा खरीदी करने के मामलों में पहले अफसरों पर जांच तक बैठ चुकी है। अस्पतालों में एक्स-रे फिल्म, सिरिंज, इलाज में काम आने वाले दूसरी अन्य सामग्री कम है या नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही है।
