राजनांदगांव , जिला अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ पर वहां नेत्र जांच कराने पहुंचे मरीज और परिजन ने अभद्र व्यवहार का का आरोप लगाया है। उन्होंने अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. महेन्द्र प्रसाद से लिखित शिकायत की है। संबधित डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मामले की जांच करने सिविल सर्जन ने आंतरिक कमेटी गठित की है। कमेटी में शामिल अस्पताल के दो डॉक्टर्स इस मामले की जांच कर सिविल सर्जन को सौंपेंगे इसके बाद इसे आगे की जांच और कार्रवाई के लिए सीएमएचओ को भेजा जाएगा।
शिकायतकर्ता परमानंद बघेल ने बताया कि उन्होंने नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. भारती प्रिया चौधरी पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाते सिविल सर्जन से शिकायत की है। दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने में अनावश्यक परेशानी उत्पन्न करने का आरोप लगाते शिकायत की है। वह 1 अगस्त 2026 को वे दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने नेत्र विभाग पहुंचे थे। 31 जुलाई 2026 की ओपीडी जांच पर्ची होने के बाद संबधित डॉक्टर ने स्वीकार नहीं किया। डॉक्टर ने पुराने प्रमाण पत्र पर संदेह व्यक्त कर दोबारा मेकाहारा अस्पताल से जांच कराने की बात कही। सिविल सर्जन डॉ. महेन्द्र प्रसाद ने शिकायत पर नेत्र रोग विशेषज्ञ को नोटिस जारी किए है। उन्होंने बताया कि एक आंतरिक कमेटी मामले की जांच करेगी। जांच रिपोर्ट सीएमएचओ को सौंपी जाएगी और कार्रवाई की जाएगी।
दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने इन बिंदुओं पर जांच दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने की सामान्य प्रक्रिया के तहत आवेदक का पंजीयन और जरुरी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है। संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सक के द्वारा चिकित्सीय परीक्षण और दिव्यांगता का सूक्ष्मता से आकलन किया जाता है। जरूरी होने पर अतिरिक्त जांच या उच्च संस्थान से परीक्षण कराने सलाह दी जा सकती है। विशेषज्ञों की अनुशंसा के आधार पर जिला मेडिकल बोर्ड दिव्यांगता प्रतिशत निर्धारित करता है। निर्धारित मानकों के अनुरूप पात्र पाए जाने की स्थिति में सक्षम प्राधिकारी द्वारा यूडीआईडी आधारित दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।
