राजनांदगांव , संस्कारधानी में तीसरा सोमवार और नाग पंचमी का दिन ऐतिहासिक रहा। शहर के 80 साल पुराने प्राचीन सिद्धपीठ बागेश्वर धाम मंदिर में नगर और प्रदेश का पहला अखंड रुद्राभिषेक 24 घंटे तक चला। सावन की रिमझिम बारिश के बीच सैकड़ों शिवभक्त शहर के बाहर से भी पहुंचे। महारुद्राभिषेक में शामिल हुए।
शैलम मल्लिकार्जुन, हैदराबाद से आए 6 पुजारियों ने सबसे पहले कांवड़ यात्रा की शुरुआत कराई। शिवनाथ नदी में मां गंगा की आरती हुई। पूजन हुआ। इसके बाद कांवड़ यात्रा निकली। यह पहली बार मंत्रोच्चार के साथ निकाली गई। बारिश के बावजूद कांवड़ यात्रियों का जोश बना रहा। कांवड़ यात्रा में मल्लिकार्जुन पूजन की शिवलिंग भी शामिल रही। नगर भ्रमण के दौरान पुजारी शिव मंत्रोच्चार करते रहे। पहली बार श्लोकों के साथ कांवड़ यात्रा निकाली गई।
दोपहर 12 बजे से अखंड शिव महारुद्राभिषेक दक्षिण भारतीय पद्धति से शुरू हुआ। दक्षिण भारतीय विधि-विधान से 24 घंटे रुद्राभिषेक हुआ। मंदिर से जुड़े 24 शिवभक्त इसमें शामिल रहे। नारायण शास्त्री और शैलम के अन्य 7 पुजारियों ने अनवरत रूप से 26 घंटे रुद्राभिषेक कराया। इसे छत्तीसगढ़ का पहला अखंड रुद्राभिषेक बताया गया। दो दिन चले रुद्राभिषेक में बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में लोग जुटे।
