CG : जैन दादाबाड़ी में जेन अल्फा ने दादागुरुदेव इक्तिसा और महाआरती में भाग लिया…
बच्चों ने अपने जेबखर्च से बचाकर आरती में रुपये अर्पित किए, गुरुभक्त ने धूपबत्ती की प्रभावना की
रायपुर । जिनकुशल सुरि जैन दादाबाड़ी भैरव सोसायटी में जारी 21 दिवसीय इक्तिसा जाप 15 वे दिन जेन अल्फा (बच्चों) ने इक्तिसा जाप व महाआरती में उत्साहपूर्वक भाग लिया। सीमंधर स्वामी जैन मंदिर व दादाबाड़ी ट्रस्ट के अध्यक्ष संतोष बैद व महासचिव महेन्द्र कोचर ने बताया कि जेन अल्फा में धर्म का बीजारोपण करने व परमात्मा व दादागुरुदेव के प्रति श्रद्धा रोपित करने के उद्देश्य से आयोजन किया गया है।
बच्चों ने संगीतमय दादागुरुदेव इक्तिसा जाप किया। बाल गायकों आरोही लोढ़ा, आदि बरमट, टिया गोलछा, दर्शिता लोढ़ा, कुक्की पारख, सिद्धि श्रीमाल, धैर्य जैन ने गुरुभक्ति में भजन प्रस्तुत किये। बच्चों को पुरस्कृत किया गया। 45 मिनट तक अनुशासन पूर्वक इक्तिसा जाप के पश्चात अंत में आरती व मंगल दीपक भी बच्चों द्वारा किया गया। बच्चों ने अपने जेबखर्च से बचाकर आरती में रुपये अर्पित किये इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बच्चों के साथ दादागुरुदेव इक्तिसा जाप कर गुरुदेव के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की।
अध्यक्ष संतोष बैद ने बच्चों से कहा कि आरती के दीपक सा प्रकाश सभी के जीवन को आलौकित करे । बच्चों में आरती करने व रुपये चढ़ाने का अपूर्व उत्साह अनुमोदना योग्य है। इक्तिसा जाप में खरतरगच्छ महिला परिषद की राष्ट्रीय संगठन मंत्री मंजू कोठारी , संतोष झाबक , महेन्द्र कोठारी , निर्मल पारख , विवेक बैद , पूनम बरमट दीप्ती बैद की सक्रिय सहभागिता है ।
ट्रस्टी नीलेश गोलछा व डॉ योगेश बंगानी ने बताया कि 21 दिवसीय इक्तिसा जाप के 15 दिनों में हजारों श्रद्धालुओं ने दादागुरुदेव की भक्ति कर पुण्य अर्जित किया। प्रतिदिन इक्तिसा जाप के अंत में लक्की ड्रा द्वारा 5 श्रद्धालुओं को पुरस्कृत किया जाता है। पुरस्कार के लाभार्थी तिलोकचंद शांतिलाल अशोक कुमार बरड़िया, मंगलचंद केशर देवी बाफना बालाजी ज्वेलर्स राजनांदगांव, स्व तनिष गोलछा के आत्मश्रेयार्थ सुशीला देवी पदमचंद गोलछा, सुभाष चंद विजय कुमार पुगलिया, महेन्द्र कुमार तरुण कुमार मानस गौरव दीया कल्प गर्वित प्रेरित कोचर परिवार हैं।
21 दिवसीय दादागुरुदेव इक्तिसा जाप में प्रतिदिन 11 परिवारों द्वारा गुरुभक्ति व आरती मंगल दीपक किया जाता है और सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति से रंगभंडप भक्तिमय हो जाता है।
