CG : लार के नमूने से होगी ड्रग स्क्रीनिंग, बिलासपुर प्रशासन ने तैयार की योजना ….
बिलासपुर: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में नशे के खिलाफ अभियान के तहत मोबाइल ड्रग टेस्टिंग मशीन का इस्तेमाल शुरू करने की तैयारी है। करीब 19 लाख रुपये की लागत वाला सो-टाक्सा मोबाइल ड्रग टेस्टिंग सिस्टम पुलिस प्रशासन को उपलब्ध कराया गया है। इसकी शुरुआत उपायुक्त कार्यालय से होगी। उपायुक्त राहुल कुमार सबसे पहले स्वयं अपना ड्रग टेस्ट करवाएंगे। इसके बाद अतिरिक्त उपायुक्त, उपमंडलाधिकारी और उपायुक्त कार्यालय के अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों की जांच की जाएगी। प्रशासन इस पहल के जरिए सरकारी तंत्र की भागीदारी का संदेश देना चाहता है।
उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि मशीन के प्रयोग की शुरुआत अपने कार्यालय और स्वयं के परीक्षण से करने के संबंध में पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फिलहाल यह परीक्षण शुरू करने की घोषणा है। अधिकारियों या कर्मचारियों की जांच रिपोर्ट सामने आने का उल्लेख नहीं है। इसलिए किसी व्यक्ति के नशा सेवन या जांच में सकारात्मक पाए जाने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। पहल का घोषित उद्देश्य नशे के विरुद्ध अभियान में प्रशासनिक जिम्मेदारी और जागरूकता को शामिल करना है।
इस उपकरण की खरीद जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट के माध्यम से की गई है। जून 2026 में जिला प्रशासन ने प्रणाली खरीदने की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दी थी। उस समय इसकी अनुमानित लागत लगभग 19 लाख रुपये बताई गई थी। प्रशासन का कहना था कि पोर्टेबल उपकरण से संबंधित एजेंसियों को मौके पर तेजी से जांच करने में मदद मिलेगी। अब अक्टूबर में सामने आई जानकारी में इसके उपयोग की शुरुआत उपायुक्त कार्यालय से करने की योजना बताई गई है।
सो-टाक्सा प्रणाली व्यक्ति की लार के नमूने की जांच के लिए तैयार की गई है। इसका उद्देश्य निर्धारित श्रेणियों के मादक पदार्थों की उपस्थिति की प्रारंभिक स्क्रीनिंग करना है। यह जब्त पाउडर या किसी संदिग्ध पैकेट की सामग्री की पहचान करने वाली मशीन नहीं है। उपकरण निर्माता के विवरण के अनुसार, हाथ में लेकर इस्तेमाल किया जा सकने वाला यह विश्लेषक हल्का और छोटा है। इसे कार्यस्थल अथवा मौके पर स्क्रीनिंग के लिए उपयोग किया जा सकता है। परिणाम कुछ मिनटों में उपलब्ध होते हैं।
बिलासपुर में उपलब्ध कराए गए सिस्टम के बारे में छह प्रमुख ड्रग श्रेणियों की जांच की जानकारी दी गई है। इनमें एम्फेटामाइन, मेथाम्फेटामाइन, बेंजोडायजेपाइन, कैनाबिस यानी टीएचसी, कोकीन और ओपिएट्स शामिल हैं। ये अलग-अलग श्रेणियां हैं। मशीन निर्धारित परीक्षण पद्धति और संबंधित कार्ट्रिज के आधार पर स्क्रीनिंग करती है। जिला प्रशासन ने उपकरण को नशे से जुड़े मामलों में शुरुआती जानकारी प्राप्त करने की सुविधा के रूप में प्रस्तुत किया है। निर्माता के अनुसार, प्रणाली में परिणामों को सुरक्षित रखने और मौके पर उनका प्रिंट निकालने की सुविधा भी है। विश्लेषक में दस हजार से अधिक परिणाम संग्रहीत किए जा सकते हैं। लार का नमूना लेने की प्रक्रिया रक्त अथवा मूत्र के नमूने की तुलना में कम हस्तक्षेप वाली बताई गई है। हालांकि, उत्पाद की सामान्य विशेषताओं और बिलासपुर में लागू होने वाली स्थानीय परीक्षण व्यवस्था को अलग समझना जरूरी है। वहां जांच का संचालन प्रशासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होगा। प्रारंभिक स्क्रीनिंग और किसी व्यक्ति पर नशे के प्रभाव का आकलन एक ही बात नहीं है। इस उपकरण से संबंधित अमेरिकी सरकारी अध्ययन में स्पष्ट किया गया है कि केवल सकारात्मक या नकारात्मक परिणाम अपने आप यह निर्धारित नहीं करता कि वाहन चालक की क्षमता नशे से प्रभावित थी। इसी तरह निर्माता द्वारा प्रकाशित एक उपयोग संबंधी विवरण में आगे की पुष्टि के लिए प्रयोगशाला परीक्षण का उल्लेख है। इस वजह से स्क्रीनिंग परिणाम को उसके निर्धारित उद्देश्य और आगे की जांच के संदर्भ में समझना आवश्यक है। बिलासपुर की पहल का प्रमुख पहलू यह है कि प्रशासनिक नेतृत्व स्वयं परीक्षण करवाकर शुरुआत करेगा। इसके बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को जांच में शामिल किया जाएगा। उपकरण की खरीद की पूर्व घोषणा से आगे बढ़ते हुए अब उसके इस्तेमाल की तैयारी सामने आई है। परीक्षण शुरू होने, कितने कर्मचारियों की जांच होने और उसके बाद की प्रक्रिया के बारे में प्रशासन की अगली जानकारी से स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल किसी जांच परिणाम या कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई की घोषणा सामने नहीं आई है।
