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➡️ हिंदू जागरण मंच ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन, प्रशासनिक लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
राजनांदगांव ।
शहर के गौरी नगर क्षेत्र में 14 अक्टूबर 2026 को गोवंश का कटा हुआ सिर मिलने की घटना को लेकर हिंदू जागरण मंच, जिला राजनांदगांव ने गंभीर चिंता जताते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन जारी कर मामले में निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच की मांग की है। मंच ने घटना में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करने के साथ ही संबंधित थाना पुलिस की भूमिका की भी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि यदि जांच में पुलिस अधिकारियों की लापरवाही, शिकायतों की अनदेखी अथवा दोषियों को अनुचित संरक्षण दिए जाने के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
हिंदू जागरण मंच ने 20 अक्टूबर 2026 को जारी ज्ञापन में कहा है कि गौरी नगर में गोवंश का कटा हुआ सिर मिलने की घटना से क्षेत्र के नागरिकों, गौ-सेवकों और हिंदू समाज में आक्रोश एवं चिंता का माहौल है। यह मामला केवल धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ नहीं है, बल्कि कानून-व्यवस्था, सामाजिक सद्भाव और प्रशासनिक जिम्मेदारी की दृष्टि से भी गंभीर है। मंच ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि मामले में तत्काल संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएं, ताकि घटना की वास्तविक परिस्थितियां सामने आएं और दोषियों को कानून के अनुसार दंड मिल सके।
निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
ज्ञापन में हिंदू जागरण मंच ने कहा है कि राजनांदगांव अपनी सांस्कृतिक परंपराओं, सामाजिक समरसता और धार्मिक आस्थाओं के लिए पहचाना जाता है। ऐसे शहर में इस तरह की घटना सामने आना चिंताजनक है। इस प्रकार की घटनाएं समाज में अविश्वास और तनाव की स्थिति पैदा कर सकती हैं। इसलिए आवश्यक है कि पुलिस एवं प्रशासन किसी भी प्रकार के दबाव या पक्षपात से मुक्त होकर निष्पक्ष जांच करें और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक दोषियों की पहचान सुनिश्चित करें।
मंच ने मांग की है कि मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों तथा जांच के दौरान जिन अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है, उनके विरुद्ध संबंधित कानूनों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही प्रकरण की सुनवाई शीघ्र कराने के लिए नियमानुसार आवश्यक कदम उठाए जाएं, जिससे दोष सिद्ध होने पर जिम्मेदार व्यक्तियों को दंड मिल सके।
संगठन ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई साक्ष्यों एवं कानून के आधार पर होनी चाहिए। वास्तविक दोषियों को किसी भी परिस्थिति में अनुचित राहत नहीं मिलनी चाहिए और मामले की जांच में पारदर्शिता बरती जानी चाहिए।
पुलिस की भूमिका की हो उच्चस्तरीय जांच
हिंदू जागरण मंच ने ज्ञापन में संबंधित थाना पुलिस की भूमिका को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इस मामले में यह पता लगाया जाना आवश्यक है कि संबंधित क्षेत्र में गोवंश से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियां कब से संचालित थीं और क्या पूर्व में भी इस प्रकार की घटनाएं हुई थीं।
मंच ने सवाल उठाया है कि क्या संबंधित व्यक्तियों की गतिविधियों के संबंध में पुलिस को पहले से कोई जानकारी या शिकायत मिली थी? यदि ऐसी शिकायतें या सूचनाएं प्राप्त हुई थीं, तो उन पर क्या कार्रवाई की गई? क्या पुलिस ने समय रहते आवश्यक कदम उठाए थे? इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि संबंधित थाना प्रभारी सहित उन सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों अथवा सक्षम जांच प्राधिकारी से कराई जाए, जिनकी जिम्मेदारी क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाने की थी।
संगठन ने कहा है कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही, कर्तव्यहीनता, प्राप्त सूचनाओं की जानबूझकर अनदेखी अथवा दोषियों को अनुचित संरक्षण दिए जाने के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए। यदि मामला कानूनी कार्रवाई की श्रेणी में आता है, तो नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।
पुरानी शिकायतों और पुलिस रिकॉर्ड की समीक्षा हो
ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि गौरी नगर और आसपास के संबंधित क्षेत्रों में गोवंश से जुड़े मामलों की पूर्व शिकायतों, दर्ज अपराधों, प्राप्त सूचनाओं तथा पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के अभिलेखों की समीक्षा की जाए।
मंच का कहना है कि जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या संबंधित गतिविधियां केवल घटना वाले दिन तक सीमित थीं अथवा पहले से संचालित हो रही थीं। यदि पूर्व में भी ऐसी घटनाओं या संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी सामने आई थी, तो उन मामलों की भी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच की जाए।
संगठन ने जोर दिया है कि जांच में किसी अधिकारी को उसके पद, प्रभाव या अन्य कारणों से संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। जिम्मेदारी के प्रत्येक स्तर की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और जहां भी लापरवाही प्रमाणित हो, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाए। मंच ने यह भी मांग की है कि जांच की प्रगति एवं निष्कर्षों के संबंध में नियमानुसार आधिकारिक जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि आम नागरिकों का पुलिस प्रशासन पर विश्वास कायम रह सके।
जिला बदर की कार्रवाई पर भी विचार करने की मांग
हिंदू जागरण मंच ने ज्ञापन में मांग की है कि यदि जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया में यह प्रमाणित होता है कि संबंधित व्यक्तियों ने जानबूझकर ऐसी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया, जिनसे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने अथवा धार्मिक वैमनस्य फैलने की स्थिति उत्पन्न हुई, तो सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रचलित कानूनों के तहत जिला बदर अथवा अन्य उपयुक्त वैधानिक कार्रवाई पर विचार किया जाए।
संगठन ने कहा है कि ऐसी कार्रवाई कानून में निर्धारित प्रक्रिया और आवश्यक तथ्यों के आधार पर की जानी चाहिए। किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध केवल आरोपों के आधार पर दंडात्मक कदम उठाने के बजाय जांच में सामने आए तथ्यों एवं साक्ष्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सीसीटीवी फुटेज और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर हो जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए मंच ने वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में उच्चस्तरीय एवं समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि घटनास्थल से प्राप्त साक्ष्यों, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, संबंधित व्यक्तियों के बयानों और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों का बारीकी से परीक्षण किया जाए।
संगठन का कहना है कि जांच का उद्देश्य घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाना, संलिप्त व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट करना और किसी भी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक रूप से परेशान होने से बचाना होना चाहिए। जांच में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखते हुए सभी पहलुओं की पड़ताल की जाए, ताकि तथ्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की मांग
हिंदू जागरण मंच ने शासन-प्रशासन से भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस व्यवस्था करने की भी मांग की है। संगठन ने कहा है कि संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस निगरानी बढ़ाई जाए तथा गोवंश से संबंधित अपराधों की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि नागरिकों से प्राप्त होने वाली महत्वपूर्ण सूचनाओं और शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर नियमानुसार तत्काल जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि समय रहते आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके और शहर में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनी रहे।
मंच ने प्रकरण में की गई कार्रवाई, जांच की स्थिति, दर्ज अपराधों, गिरफ्तारियों और पुलिस अधिकारियों की भूमिका से संबंधित विभागीय जांच के बारे में नियमानुसार आधिकारिक जानकारी उपलब्ध कराने की मांग भी की है।
मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप का आग्रह
ज्ञापन के अंत में हिंदू जागरण मंच, जिला राजनांदगांव ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि गौरी नगर की घटना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक निर्देश दिए जाएं। संगठन ने कहा है कि मामले में निष्पक्ष जांच, दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई और यदि प्रशासनिक लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है।
मंच ने कहा कि गोवंश के प्रति आस्था रखने वाले नागरिकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए कानून के दायरे में रहकर प्रभावी कार्रवाई की जानी चाहिए। वास्तविक दोषियों की पहचान कर उन्हें कानून के अनुसार दंड दिलाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना शासन-प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
हिंदू जागरण मंच ने उम्मीद जताई है कि छत्तीसगढ़ शासन इस संवेदनशील मामले में शीघ्र संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच एवं न्यायोचित कार्रवाई सुनिश्चित करेगा, जिससे समाज में कानून के प्रति विश्वास मजबूत हो और क्षेत्र में शांति एवं सामाजिक सद्भाव बना रहे।





