राजनांदगांव : सुआ गीतों की खनक, महिलाओं के पारंपरिक नृत्य ने लुभाया, कवियों ने पढ़ीं अपनी रचनाएं …
राजनांदगांव l छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति में रचे-बसे सुआ गीतों की खनक, महिलाओं के पारंपरिक नृत्य और कविताओं की रसधार के बीच शंकर नगर बालोद में तीन दिवसीय सुआ नृत्य महोत्सव और साहित्य संगम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। समरथ साहित्य संस्थान साहित्य सृजन भारत की छत्तीसगढ़ इकाई के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे कवि-साहित्यकारों ने लोककला और साहित्य की समृद्ध परंपरा को मंच दिया।
महिलाओं ने तालियों की थाप के साथ सुआ गीत गाकर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया। साहित्यिक चर्चाओं, काव्य पाठ एवं पुस्तकों के विमोचन ने आयोजन को गरिमा प्रदान की। महोत्सव के दौरान महिलाओं की सुआ नृत्य प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही। पारंपरिक गीतों की लय और सामूहिक नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया। दूसरे दिन के मुख्य अतिथि लिमोरा स्थित चौंसठ योगिनी मंदिर के गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख ने कहा कि लोककला और साहित्य समाज को आपस में जोड़ने का काम करते हैं। विशिष्ट अतिथि एवं छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के जिला समन्वयक आत्माराम कोशा ने सुआ नृत्य-गीत को राज्य की सांस्कृतिक धरोहर बताया।
लोकगीतों में दिखी प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत अतिथियों ने कहा कवि और साहित्यकार छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और परंपराओं को देश-विदेश तक पहुंचा रहे हैं। तीसरे दिन भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमैन तोमन लाल साहू मुख्य अतिथि रहे । उन्होंने सुआ नृत्य जैसी पारंपरिक लोककला को मंच प्रदान करने कवि गायत्री साहू, पति पूर्णानंद साहू एवं समरथ साहित्य संस्थान के प्रयासों की सराहना की। अध्यक्षता संस्थान के प्रांतीय अध्यक्ष अखिलेश मिश्रा ने की।
तीन पुस्तकों का विमोचन रचनाओं की हुई समीक्षा साहित्य संगम में पुस्तकों से साहित्य की विधाओं को सामने लाया गया। अतिथि जगदीश देशमुख, सीताराम श्याम, डॉ. अशोक आकाश एवं आत्माराम कोशा के हाथों डॉ. इकबाल खान की गजल संग्रह, गायत्री साहू की पुस्तक और कवि गजेंद्र हरिहारणो के गजल संग्रह का विमोचन किया गया। उपस्थित साहित्यकारों ने पुस्तकों की विषयवस्तु और रचनात्मक पक्ष की समीक्षा की। कहा सुआ को प्राण का प्रतीक माना गया है।
